Bird Language: सोचिए। सुबह चाय पी रहे हैं और छत पर बैठी चिड़िया चहक रही है। अचानक आप समझ जाएं कि वो “मैं यहीं हूं” कह रही है या “खतरा है, भागो”।अब ये कल्पना नहीं लगती। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया, बर्कली की डॉ. जूली एली ने 15 साल की मेहनत के बाद इसे काफी हद तक सच कर दिखाया है। इस काम के लिए उन्हें कॉलर डूलिटल अवार्ड और 1 लाख डॉलर का इनाम मिला है।
रिसर्च किस पर हुई
डॉ. एली ने जेब्रा फिंच नाम के छोटे पक्षियों पर काम किया। ये वही फिंच हैं जो अक्सर पिंजरे में दिख जाते हैं।15 साल तक उन्होंने इनकी हर आवाज रिकॉर्ड की। कब कौन सी आवाज निकली, किस समय निकली, किसके सामने निकली। फिर AI की मदद से हर आवाज का एनालिसिस किया।नतीजा चौंका देने वाला था।
रिसर्च में पता चला कि जेब्रा फिंच अपनी बातचीत में 11 तरह की अलग-अलग आवाजें इस्तेमाल करते हैं। और हर आवाज का मतलब अलग है।सबसे खास बात ये है। हर पक्षी की आवाज का एक अलग “वॉयस सिग्नेचर” होता है। ठीक वैसे जैसे इंसानों की आवाज अलग होती है।इसी सिग्नेचर से वो अपने साथी को पहचानते हैं। बच्चों से बात करते हैं। और बताते हैं कि वो क्या कर रहे हैं।मतलब पक्षी सिर्फ आवाज नहीं निकालते। वो सुनते भी हैं और अर्थ भी समझते हैं।

Bird Language: यह कैसे साबित किया
डॉ. एली ने एक दिलचस्प टेस्ट किया।उन्होंने फिंच को अलग आवाजें सुनाईं। कुछ आवाजों के बाद उन्हें बीज इनाम में मिले। कुछ के बाद नहीं मिले।कुछ ही देर में पक्षी समझ गए। उन्हें पता चल गया कि कौन सी आवाज का मतलब “बीज मिलेगा” है। वो उसी आवाज पर ज्यादा ध्यान देने लगे।दूसरा टेस्ट। रिकॉर्ड की गई आवाजें दूसरे फिंच को सुनाईं। पक्षियों का रिएक्शन बिल्कुल वैसा ही था जैसा असली खतरे या खाने के समय होता है।
यह खोज क्यों मायने रखती है
डॉ. एली कहती हैं कि ये इंसानों और जानवरों के बीच बातचीत की तरफ पहला बड़ा कदम है।अगर फिंच की भाषा समझ सकते हैं तो शायद व्हेल, डॉल्फिन, बंदर और हाथी की भी समझ सकते हैं। दुनिया भर में AI की मदद से अब इसी पर काम हो रहा है।तेल अवीव यूनिवर्सिटी में भी ऐसी ही रिसर्च हुई है। वहां पाया गया कि चिकाड़ी, कौवे और मुर्गियां भी खाने, खतरे और साथी को बुलाने के लिए अलग-अलग आवाजें निकालते हैं। कई पक्षियों की अपनी सिग्नेचर कॉल भी होती है।
क्या हम कभी जानवरों से बात कर पाएंगे?
कॉलर डूलिटल अवार्ड देने वालों का मानना है कि हां। इसी वजह से उन्होंने 1 करोड़ डॉलर का ग्रैंड प्राइज भी रख दिया है। जो भी इंसान और जानवर के बीच पूरी बातचीत करवा देगा, उसे ये रकम मिलेगी।साइंटिस्ट मानते हैं कि अभी वो दिन दूर है। पर जेब्रा फिंच वाली रिसर्च ने साबित कर दिया कि जानवरों की आवाज सिर्फ शोर नहीं है। उसके पीछे एक पूरी भाषा छिपी है।अगली बार जब कोई चिड़िया चहकाए तो ध्यान से सुनिए। शायद वो आपसे कुछ कह रही हो।
Written by- Mansi Sharma
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