Blast In Punjab: पंजाब में सुरक्षा हालात को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता सामने आई है। हाल के घटनाक्रम और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई से यह संकेत मिल रहे हैं कि पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क, खालिस्तानी आतंकी संगठन और गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ राज्य को अस्थिर करने की कोशिश में सक्रिय हैं।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
अप्रैल 2026 में पटियाला-राजपुरा रेल ट्रैक पर कम तीव्रता का आईईडी विस्फोट हुआ, जिसे बड़े हमले की साजिश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर ग्रेनेड हमला हुआ, जिससे सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। इससे पहले जनवरी 2026 में गणतंत्र दिवस से ठीक पहले सिरहिंद रेलवे ट्रैक पर विस्फोट किया गया था। नवंबर 2025 में मोगा के सीआईए कार्यालय पर ग्रेनेड हमला और मार्च 2025 में अमृतसर के खंदवाला इलाके में धार्मिक स्थल के बाहर धमाका भी सामने आया था।

Blast In Punjab: अमृतसर में हथियारों की लगातार बरामदगी
इन घटनाओं के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने कई बड़ी साजिशों को नाकाम भी किया है। अप्रैल 2026 में तरनतारन से भारी मात्रा में आरडीएक्स और आधुनिक हथियार बरामद किए गए। जनवरी 2026 में होशियारपुर में बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) से जुड़े मॉड्यूल से ढाई किलो आरडीएक्स, पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए। गुरदासपुर, नवांशहर और अमृतसर में हथियारों की लगातार बरामदगी यह दर्शाती है कि आतंकी नेटवर्क अभी भी सक्रिय हैं। खासकर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के जरिए हथियार और विस्फोटक गिराने की घटनाएं बड़ी चुनौती बन गई हैं। अमृतसर और फिरोजपुर सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन गतिविधियां कई बार पकड़ी गई हैं।
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जांच में यह भी सामने आया है कि इन गतिविधियों के पीछे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और विदेशों में सक्रिय खालिस्तानी आतंकी जुड़े हुए हैं। इनमें रंजीत सिंह नीटा और लखबीर सिंह लंडा जैसे नाम प्रमुख हैं। गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ अब नई चुनौती के रूप में सामने आया है। वर्ष 2025 में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने 400 से अधिक गैंगस्टर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच तालमेल बढ़ रहा है। भाजपा नेता मनोरंजन कालिया के घर पर ग्रेनेड हमला और पुलिस ठिकानों को निशाना बनाने की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि इन संगठनों का मकसद राज्य में डर का माहौल बनाना है। हालांकि, पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की सतर्कता से कई हमले टाले गए हैं, लेकिन सीमा पार से मिल रहे समर्थन और स्थानीय नेटवर्क के कारण खतरा अभी भी बना हुआ है। फिलहाल पंजाब संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।








