Blind Dream Science: सपने हर इंसान की जिंदगी का एक रहस्यमयी हिस्सा हैं। अक्सर यह सवाल लोगों के मन में उठता है कि जो व्यक्ति जन्म से अंधा है या जिसने बचपन से कभी दुनिया को देखा ही नहीं, क्या उसे भी सपने आते हैं? यदि आते हैं तो वह अपने सपनों में क्या देखता होगा? वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि सपने देखना आंखों का नहीं बल्कि मस्तिष्क का कार्य है। यही वजह है कि दृष्टिहीन लोग भी सपने देखते हैं, लेकिन उनके सपनों का स्वरूप सामान्य लोगों से काफी अलग होता है।
सपने देखने का संबंध आंखों से नहीं, दिमाग से है
विशेषज्ञों के अनुसार सपने हमारी यादों, अनुभवों और भावनाओं का मिश्रण होते हैं। मस्तिष्क नींद के दौरान इन्हीं अनुभवों को अलग-अलग रूप में प्रस्तुत करता है। इसलिए किसी व्यक्ति के सपनों की प्रकृति इस बात पर निर्भर करती है कि उसने अपने जीवन में दृश्य अनुभव किए हैं या नहीं।
Blind Dream Science: जन्म से अंधे लोगों के सपने कैसे होते हैं?
जो लोग जन्म से दृष्टिहीन होते हैं या चार से पांच वर्ष की उम्र से पहले अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं, उनके पास किसी भी तरह की दृश्य स्मृतियां मौजूद नहीं होतीं। ऐसे लोग सपनों में रंग, चेहरे, दृश्य या प्राकृतिक नजारे नहीं देखते। उनके सपने ध्वनियों, स्पर्श, गंध, स्वाद और भावनाओं से बने होते हैं।उनके लिए किसी परिचित व्यक्ति की आवाज, बारिश की बूंदों का एहसास, किसी फूल की खुशबू, पसंदीदा भोजन का स्वाद या किसी अपने का स्पर्श ही सपनों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है। यानी उनका मस्तिष्क उन्हीं इंद्रियों के आधार पर सपनों की दुनिया तैयार करता है, जिनका वे वास्तविक जीवन में उपयोग करते हैं।
Blind Dream Science: ध्वनि और स्पर्श निभाते हैं सबसे बड़ी भूमिका
वैज्ञानिकों का मानना है कि जन्म से अंधे लोगों के सपनों में सबसे अधिक महत्व सुनने और महसूस करने का होता है। बातचीत की आवाज, संगीत, कदमों की आहट या आसपास की परिचित ध्वनियां उनके सपनों का प्रमुख हिस्सा होती हैं। इसके अलावा वे वस्तुओं की बनावट, तापमान, आकार और स्पर्श को भी सपनों में उसी तरह महसूस कर सकते हैं, जैसे सामान्य लोग किसी दृश्य को देखते हैं।
गंध, स्वाद और भावनाओं से बनती है सपनों की दुनिया
दृष्टिहीन लोगों के सपनों में केवल ध्वनि और स्पर्श ही नहीं, बल्कि गंध, स्वाद और भावनाएं भी बेहद प्रभावशाली होती हैं। किसी प्रिय भोजन का स्वाद, बारिश की मिट्टी की खुशबू, फूलों की महक या किसी करीबी व्यक्ति के साथ जुड़ी भावनाएं उनके सपनों को जीवंत बनाती हैं। खुशी, डर, उत्साह, दुख और चिंता जैसी भावनाएं भी उतनी ही गहराई से महसूस होती हैं जितनी सामान्य दृष्टि वाले लोगों में।
Blind Dream Science: शोध में सामने आए दिलचस्प तथ्य
डेनमार्क के शोधकर्ताओं और स्लीप फाउंडेशन से जुड़े अध्ययनों के अनुसार जन्म से दृष्टिहीन लोगों के लगभग 86 प्रतिशत सपनों में सुनने का अनुभव शामिल होता है, जबकि करीब 70 प्रतिशत सपनों में स्पर्श का अनुभव प्रमुख रूप से मौजूद रहता है। इससे स्पष्ट होता है कि मस्तिष्क उपलब्ध इंद्रियों के आधार पर सपनों की रचना करता है।
जो बाद में अंधे हुए, उनके सपने होते हैं अलग
जिन लोगों ने पांच से सात वर्ष की उम्र के बाद अपनी दृष्टि खोई होती है, उनके मस्तिष्क में पहले से ही दृश्य स्मृतियां सुरक्षित रहती हैं। यही कारण है कि ऐसे लोग अपने सपनों में लोगों के चेहरे, रंग, इमारतें, प्रकृति और अन्य दृश्य देख सकते हैं। उनकी सपनों की दुनिया काफी हद तक वैसी ही होती है जैसी उनकी दृष्टि खोने से पहले थी।कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि दृष्टिबाधित लोगों को सामान्य लोगों की तुलना में डरावने या बुरे सपने अधिक आ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण दैनिक जीवन में आने वाली चुनौतियां, असुरक्षा की भावना और वातावरण को समझने का अलग अनुभव हो सकता है।वैज्ञानिक शोध यह साबित करते हैं कि सपने केवल देखने का अनुभव नहीं, बल्कि मस्तिष्क की रचनात्मक प्रक्रिया हैं। जन्म से अंधे लोग भी सपने देखते हैं, लेकिन उनके सपने आंखों से दिखाई देने वाली तस्वीरों के बजाय आवाज, स्पर्श, गंध, स्वाद और भावनाओं से बने होते हैं। वहीं जिन लोगों ने जीवन में बाद में दृष्टि खोई है, वे अपनी पुरानी दृश्य स्मृतियों के कारण सपनों में रंगों और चेहरों को भी देख सकते हैं। यह तथ्य बताता है कि इंसानी मस्तिष्क परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालते हुए सपनों की दुनिया भी अलग-अलग तरीके से रचता है।
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