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BMC चुनाव से पहले बीजेपी संकट में? अपनों के बयान से बिगड़ता खेल, मराठी अस्मिता बनी बड़ा मुद्दा

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BMC Election 2026: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। वजह विपक्ष नहीं, बल्कि पार्टी के कुछ नेताओं के बयान हैं, जिन्होंने चुनावी माहौल को गरमा दिया है। ऐसे में मतदान से ठीक पहले सियासी समीकरण बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। बता दें कि BMC सहित राज्य की 29 नगर निकायों के लिए 15 जनवरी 2026 को मतदान होना है। चुनाव प्रचार के बीच बीजेपी नेताओं के बयानों ने मराठी अस्मिता और क्षेत्रीय पहचान को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।

अन्नामलाई के बयान से शुरू हुआ विवाद

चुनावी माहौल के बीच बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष अन्नामलाई के एक बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी। उन्होंने कहा था कि मुंबई सिर्फ महाराष्ट्र का शहर नहीं, बल्कि एक इंटरनेशनल शहर है। उन्होंने मुंबई के 75 हजार करोड़ रुपये के बजट की तुलना चेन्नई और बेंगलुरु से करते हुए यह टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद महाराष्ट्र में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने अन्नामलाई को आड़े हाथों लेते हुए कड़ा पलटवार किया, जिससे विवाद और गहरा गया।

BMC Election 2026: कृपाशंकर सिंह के बयान ने बढ़ाई बेचैनी

बीजेपी की मुश्किलें यहीं नहीं थमीं। उत्तर प्रदेश के जौनपुर से पूर्व सांसद कृपाशंकर सिंह के एक बयान ने भी सियासी तापमान बढ़ा दिया। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था कि मीरा-भायंदर में उत्तर भारतीय और हिंदी भाषी मेयर बनाया जाना चाहिए। उन्होंने हिंदी भाषी पार्षदों को जिताने की अपील की थी।
इस बयान को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और मनसे ने मराठी अस्मिता से जोड़ते हुए बीजेपी पर हमला बोला।

मनसे का आरोप, बीजेपी की मंशा उजागर

मनसे नेता अविनाश जाधव ने कृपाशंकर सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीजेपी की नीति और मंशा साफ हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी मराठी वोट सिर्फ सत्ता के लिए चाहती है, जबकि असल मुद्दों से समझौता कर रही है।

BMC Election 2026: फडणवीस ने संभाली स्थिति

विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि बीजेपी ने कभी मराठी अस्मिता से समझौता नहीं किया है। उन्होंने चुनावी सभाओं में कहा कि बीजेपी ही मराठी मानुष और मराठी माटी की सच्ची आवाज है।

सियासी जानकारों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी नेताओं के ये बयान चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ जानकारों का कहना है कि इससे ऐसे वोटर्स भी सक्रिय हो सकते हैं, जो अब तक बीजेपी से दूरी बनाए हुए थे। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि मराठी पहचान से जुड़े मुद्दे विपक्ष को फायदा पहुंचा सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मतदान से पहले इन बयानों का जनता पर क्या असर पड़ता है और क्या यह BMC चुनाव में राजनीतिक तस्वीर बदलने का कारण बनेंगे।

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