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पंजाब कांग्रेस में फिर बढ़ी कलह, चुनाव से पहले संगठन पर घमासान; हाईकमान के सामने नई चुनौती

Charanjit Singh Channi:

 Charanjit Singh Channi: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस एक बार फिर अंदरूनी खींचतान में उलझती नजर आ रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष पद पर अमरिंदर राजा वड़िंग की दोबारा नियुक्ति से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाला गुट नाराज है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह विवाद जल्द नहीं सुलझा तो इसका असर पार्टी की चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।

प्रदेश अध्यक्ष को लेकर आमने-सामने चन्नी और वड़िंग गुट

कांग्रेस हाईकमान ने अमरिंदर राजा वड़िंग पर दोबारा भरोसा जताते हुए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखा है। हालांकि, चन्नी समर्थक इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। बागी गुट का कहना है कि संगठन की कमान किसी नए चेहरे को सौंपी जानी चाहिए और मौजूदा नेतृत्व उन्हें स्वीकार नहीं है।

 Charanjit Singh Channi: भूपेश बघेल की बैठकों से भी नहीं निकला समाधान

विवाद को सुलझाने के लिए प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने विधायकों, पूर्व विधायकों, चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत करीब 90 नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की। कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी। आखिर में बघेल ने नेताओं का संदेश हाईकमान तक पहुंचाने की बात कहकर बैठक समाप्त की।

 Charanjit Singh Channi: सीएम चेहरे को लेकर भी बढ़ सकती है मुश्किल

प्रदेश अध्यक्ष का पद सीधे मुख्यमंत्री पद का दावेदार तय नहीं करता, लेकिन टिकट वितरण और चुनावी रणनीति में उसकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में यदि संगठनात्मक विवाद जारी रहा तो आगे चलकर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर भी नया टकराव खड़ा हो सकता है। राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि हाईकमान चन्नी गुट की कुछ मांगें मान लेता है तो क्या अमरिंदर राजा वड़िंग और उनके समर्थक इसे सहजता से स्वीकार करेंगे।

2022 जैसी स्थिति दोहराने का खतरा

2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी कांग्रेस में तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच लंबे समय तक मतभेद रहे थे। टिकट वितरण और चुनाव प्रचार तक दोनों नेताओं के बीच खींचतान देखने को मिली थी। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। ऐसे में पार्टी के सामने एक बार फिर पुराने हालात दोहराने का खतरा खड़ा हो गया है।

राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता की होगी परीक्षा

पंजाब में कांग्रेस अभी भी आम आदमी पार्टी की सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी मानी जाती है। राज्य में सत्ता विरोधी माहौल का लाभ उठाने का मौका भी पार्टी के पास है, लेकिन अंदरूनी कलह उसकी राह मुश्किल बना सकती है। अब सभी की नजर कांग्रेस हाईकमान और खासतौर पर राहुल गांधी पर टिकी है कि वे पंजाब कांग्रेस में जारी विवाद का समाधान कैसे निकालते हैं और चुनाव से पहले संगठन को एकजुट करने में कितने सफल होते हैं।

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