China news: ताइवान को लेकर चीन की लगातार बढ़ती बयानबाजी और दबाव के बीच यूरोपीय देश चेक गणराज्य ने साफ शब्दों में अपना रुख जाहिर कर दिया है। चेक सीनेट के अध्यक्ष मिलोस विस्ट्रचिल ने ताइवान दौरे के दौरान चीन को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि बीजिंग को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि चेक गणराज्य किन देशों या क्षेत्रों के साथ संबंध रखेगा। ताइवान की संसद में स्पीकर हान कुओ-यू के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान विस्ट्रचिल ने कहा कि ताइवान और चेक गणराज्य दोनों लोकतांत्रिक इकाइयां हैं और अपने फैसले खुद लेने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि चेक गणराज्य अपनी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को किसी बाहरी दबाव में नहीं बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय करता है।
चीन के विरोध को किया खारिज
दरअसल, विस्ट्रचिल के ताइवान दौरे पर प्राग स्थित चीनी दूतावास ने आपत्ति जताई थी। चीन ने इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल बताते हुए चेक गणराज्य से ‘वन चाइना’ सिद्धांत का पालन करने की अपील की थी। हालांकि चेक नेता ने इस आलोचना को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि चेक गणराज्य अपनी स्वतंत्र ‘वन चाइना’ नीति का पालन करता है और ताइवान के साथ संसदीय स्तर पर होने वाले संवाद और सहयोग को अपनी विदेश नीति का वैध हिस्सा मानता है।
China news: सांसदों का भी मिला समर्थन
विस्ट्रचिल ने बताया कि ताइवान यात्रा से पहले उन्होंने सीनेट के अन्य सदस्यों से इस मुद्दे पर चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि 80 प्रतिशत से अधिक सांसदों ने ताइवान के साथ संबंध मजबूत करने की पहल का समर्थन किया। उन्होंने यह भी कहा कि ताइवान और चेक गणराज्य के बीच बढ़ता सहयोग दोनों पक्षों के लिए आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो रहा है। लोकतांत्रिक देशों को अपनी साझेदारियों का फैसला किसी अधिनायकवादी दबाव में नहीं करना चाहिए।
ताइवान ने जताया आभार
China news: वहीं ताइवान की संसद के अध्यक्ष हान कुओ-यू ने चेक गणराज्य के समर्थन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं होने के बावजूद चेक गणराज्य लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ताइवान का समर्थन करता रहा है। हान ने जानकारी दी कि अगस्त से ताइपे और प्राग के बीच अतिरिक्त सीधी उड़ानें शुरू की जाएंगी। उनका कहना है कि इससे व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के बढ़ते सहयोग और मजबूत होते रिश्तों का बड़ा संकेत बताया।
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