CJI Surya Kant: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस Surya Kant ने शनिवार को अपनी ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ वाली टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया है। CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि उन लोगों के लिए थी जो फर्जी और नकली डिग्रियों के सहारे वकालत जैसे पेशों में प्रवेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में भी ऐसे लोग घुस आए हैं। वे परजीवियों की तरह व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं।”
क्या था पूरा मामला
दरअसल, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चीफ जस्टिस ने 15 मई को सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर बहस शुरू हो गई थी।
CJI Surya Kant: याचिका पर हो रही थी सुनवाई
15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की बेंच वकील संजय दुबे की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता ने सीनियर एडवोकेट का दर्जा देने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने सवाल उठाया कि क्या सीनियर एडवोकेट का टैग केवल स्टेटस सिंबल बनकर रह गया है या यह न्याय व्यवस्था में योगदान का माध्यम है।
इसी दौरान CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि कई लोग बिना योग्यता के काले चोगे पहनकर घूम रहे हैं और उनकी डिग्रियों पर गंभीर सवाल हैं।
CJI Surya Kant: सुप्रीम कोर्ट की नई वर्किंग गाइडलाइन
इधर प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचत अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नई कार्य व्यवस्था लागू की है।नई गाइडलाइन के अनुसार अब कोर्ट के हर विभाग का स्टाफ सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम करेगा। जजों को कार पूलिंग अपनाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा रजिस्ट्री से जुड़े 50 फीसदी कर्मचारियों को भी घर से काम करने की अनुमति दी गई है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है कि सोमवार, शुक्रवार और मिसलेनियस डे पर सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। अन्य कार्य दिवसों में भी कई मामलों की ऑनलाइन सुनवाई जारी रखी जाएगी।
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