Cm Vijay: तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख C. Joseph Vijay का एक सोशल मीडिया पोस्ट विवाद का कारण बन गया है। ‘मुल्लीवाइक्कल स्मरण दिवस’ पर किए गए इस पोस्ट को लेकर विपक्षी दलों और कुछ राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे। हालांकि अब टीवीके (TVK) ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि विजय का पोस्ट किसी व्यक्ति विशेष या प्रतिबंधित संगठन के समर्थन में नहीं था, बल्कि श्रीलंकाई तमिलों के साथ हुई मानवीय त्रासदी को याद करने के लिए था। 18 मई को विजय ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि, “हम मुल्लीवाइक्कल की यादों को अपने दिलों में संजोकर रखेंगे। हम समुद्र पार रहने वाले अपने तमिल भाई-बहनों के अधिकारों के लिए हमेशा एकजुट होकर खड़े रहेंगे।” इसके बाद सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को लेकर बहस तेज हो गई और कुछ लोगों ने इसे LTTE प्रमुख Velupillai Prabhakaran की डेथ एनिवर्सरी से जोड़ दिया।
TVK ने क्या दी सफाई?
विवाद बढ़ने के बाद टीवीके की ओर से कहा गया कि विजय ने अपने पोस्ट में कहीं भी प्रभाकरन का नाम नहीं लिया था। पार्टी का कहना है कि ‘मुल्लीवाइक्कल’ श्रीलंका में गृहयुद्ध के दौरान मारे गए हजारों तमिल नागरिकों की पीड़ा और नरसंहार की याद का प्रतीक है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, निर्दोष लोगों की मौत और मानवीय त्रासदी को याद करना किसी भी जिम्मेदार नेता का कर्तव्य है। टीवीके ने यह भी साफ किया कि उनका रुख केवल तमिल नागरिकों के अधिकारों और मानवाधिकारों के मुद्दे तक सीमित है, किसी प्रतिबंधित संगठन के समर्थन से उसका कोई संबंध नहीं है।
Cm Vijay: आखिर क्यों हुआ विवाद?
दरअसल, साल 2009 में श्रीलंका के गृहयुद्ध के अंतिम चरण में मुल्लीवाइक्कल क्षेत्र में LTTE प्रमुख प्रभाकरन की मौत हुई थी। इसी वजह से हर साल 18 मई को एक वर्ग ‘मुल्लीवाइक्कल स्मरण दिवस’ के तौर पर इसे याद करता है। वहीं आलोचक इसे LTTE से जोड़कर देखते हैं। भारत में LTTE एक प्रतिबंधित संगठन है। पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi की 1991 में हुई हत्या के मामले में प्रभाकरन मुख्य आरोपी माना गया था। हालांकि उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी और 2009 में श्रीलंका में उसकी मौत हो गई थी।
तमिलनाडु की राजनीति में क्यों अहम है मामला?
Cm Vijay: तमिलनाडु की मुख्यधारा की राजनीति में आमतौर पर राजनीतिक दल LTTE या प्रभाकरन के खुले समर्थन से दूरी बनाकर रखते हैं। ऐसे में विजय के पोस्ट को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई थीं। हालांकि टीवीके अब यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है कि पार्टी का फोकस केवल श्रीलंकाई तमिलों के अधिकार और मानवीय मुद्दों पर है, न कि किसी उग्रवादी संगठन के समर्थन पर।
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