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केरल हाई कोर्ट का बड़ा बयान: मेडिकल कॉलेज बने उत्पीड़न के अड्डे, जांच समिति के गठन का सुझाव

मेडिकल एब्यूज पर केरल हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

College Harassment Case: केरल हाई कोर्ट ने कुछ मेडिकल कॉलेजों में मौजूद गंभीर माहौल की कड़ी आलोचना की है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि शिक्षकों द्वारा कथित उत्पीड़न की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाए, जो छात्रों की सुरक्षा के लिए सुधारात्मक उपाय भी बताए।यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें एक दंत चिकित्सा कॉलेज के प्रोफेसर ने एक छात्र की आत्महत्या से जुड़े केस में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हालांकि यह मामला एक व्यक्ति से जुड़ा था, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह समस्या केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में एक गंभीर और व्यापक मुद्दा बन चुकी है।

जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि राज्य सरकार को इस पर व्यवस्थित तरीके से जांच करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केरल के मेडिकल कॉलेज छात्रों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनके अनुसार, छात्रों के साथ, यहां तक कि पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के साथ भी, बहुत कठोर व्यवहार किया जा रहा है और इस तरह की कई शिकायतें सामने आती रहती हैं।

College Harassment Case: छात्रों की चुप्पी पर चिंता

कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि कई छात्र डर की वजह से अपनी समस्याएं सामने नहीं रख पाते। उन्हें डर होता है कि शिकायत करने पर उनके शैक्षणिक भविष्य पर असर पड़ सकता है। इसी कारण पीड़ित छात्र लंबे समय तक मानसिक उत्पीड़न सहते रहते हैं, लेकिन कॉलेज प्रशासन या शिक्षकों के खिलाफ आवाज नहीं उठाते।

स्वतंत्र समिति का सुझाव

न्यायाधीश ने सुझाव दिया कि एक स्वतंत्र समिति बनाई जानी चाहिए, जो छात्रों से गोपनीय तरीके से प्रतिक्रिया ले सके। यह समिति समस्या की गहराई का अध्ययन करे और सुधार के लिए जरूरी कदमों की सिफारिश करे।

कोर्ट ने संस्थानों में एक खतरनाक पैटर्न की ओर भी इशारा किया, जिसे उसने ‘सास सिंड्रोम’ कहा। इसका मतलब है कि जो लोग पहले उत्पीड़न झेल चुके होते हैं, वे बाद में अधिकार मिलने पर उसी तरह का व्यवहार दूसरों के साथ करने लगते हैं।

देशभर में बढ़ती चिंता

कोर्ट ने कहा कि यह मामला सिर्फ केरल तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के व्यावसायिक कॉलेजों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई के दबाव और शिक्षकों द्वारा कथित उत्पीड़न को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।

इस मुद्दे पर फिर से ध्यान इस साल की शुरुआत में तब गया, जब कन्नूर के एक डेंटल कॉलेज के छात्र की मौत हो गई थी। इस घटना ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव, शैक्षणिक उत्पीड़न और जवाबदेही को लेकर बड़ी बहस शुरू कर दी थी।

मांगें और सुधार की जरूरत

छात्र संगठनों और शिक्षा कार्यकर्ताओं का कहना है कि कॉलेजों में मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली होनी चाहिए। साथ ही, स्वतंत्र शिकायत व्यवस्था और व्यावसायिक कॉलेजों पर बेहतर निगरानी की भी लंबे समय से मांग की जा रही है।