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अर्नब के बाद मुरासु की दस्तक, एक हफ्ते में दो चक्रवात से समुद्र में क्यों मची हलचल; सर्दी पर क्या होगा असर?

दो चक्रवातों के बीच देश में मौसम का बड़ा बदलाव
दो चक्रवातों के बीच देश में मौसम का बड़ा बदलाव

Cyclone Murasu Alert: छत्तीसगढ़ के आसमान में लालिमा दिखाई दे रही है, वहीं देश के कई हिस्सों में अचानक तापमान गिरने से ठंड का असर बढ़ने लगा है। इस बीच मौसम विभाग ने 9 राज्यों में बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम में आए इस बदलाव के पीछे चक्रवाती तूफान अर्नब और मुरासु को वजह माना जा रहा है।28 अक्टूबर को चक्रवाती तूफान अर्नब आंध्र प्रदेश के तट से टकराया था। इसके महज 5 दिन बाद बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवात मुरासु सक्रिय हो गया। यानी एक हफ्ते के भीतर दो चक्रवात बने और दोनों का संबंध बंगाल की खाड़ी से है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी कम अवधि में दो चक्रवात कैसे आए? क्या इसके पीछे समुद्र में हो रही कोई बड़ी हलचल है और इनका देश में सर्दी के मौसम पर क्या असर पड़ेगा? आइए, इन सभी सवालों को समझते हैं।

Cyclone Murasu Alert: एक हफ्ते में दो चक्रवात आने की वजह क्या है?

उत्तर हिंद महासागर में चक्रवात आने के दो प्रमुख मौसम होते हैं। पहला मानसून से पहले का समय है, जो अप्रैल से जून की शुरुआत तक रहता है। दूसरा मानसून के बाद का समय है, जो अक्टूबर से दिसंबर के बीच होता है। भारत में आमतौर पर हर साल 4 से 5 चक्रवात आते हैं। मुरासु इस साल का दूसरा चक्रवात है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, एक हफ्ते के भीतर लगातार दो चक्रवातों का बनना कोई असामान्य घटना नहीं है। इसकी एक बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी के पानी का सामान्य से गर्म होना है।दरअसल, मानसून के दौरान गंगा, ब्रह्मपुत्र और गोदावरी जैसी बड़ी नदियों का काफी मीठा पानी समुद्र में पहुंचता है। मीठा पानी समुद्र के खारे पानी की तुलना में हल्का होता है। इसलिए यह समुद्र की ऊपरी सतह पर जमा रहता है और नीचे मौजूद ठंडे पानी को ऊपर आने से रोकता है। इस वजह से समुद्र की ऊपरी सतह का पानी गर्म बना रहता है। यही गर्म पानी चक्रवात बनने और उसके मजबूत होने के लिए ऊर्जा का काम करता है।

बंगाल की खाड़ी में सबसे ज्यादा चक्रवात क्यों आते हैं?

भारत में आने वाले करीब 80% चक्रवात बंगाल की खाड़ी से उठते हैं, जबकि अरब सागर से लगभग 20% चक्रवात आते हैं। इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं। पहला, चक्रवात बनने के लिए समुद्र की सतह का तापमान कम से कम 26.5 डिग्री सेल्सियस होना जरूरी है। बंगाल की खाड़ी तीन तरफ से जमीन से घिरी हुई है, इसलिए यहां का पानी ज्यादा गर्म रहता है। फिलहाल इसका तापमान करीब 28 डिग्री सेल्सियस बताया गया है। इसके उलट अरब सागर ज्यादा खुला हुआ है। यह भारत, ओमान और अफ्रीका के बीच फैला है। यहां ठंडी हवाएं चलने के कारण समुद्र के पानी का तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है।

दूसरा कारण दूसरे समुद्री तूफानों का बंगाल की खाड़ी तक पहुंचना है। प्रशांत महासागर और दक्षिण चीन सागर में बनने वाले टाइफून जब पश्चिम की ओर बढ़ते हैं, तो वियतनाम और थाईलैंड से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुंच सकते हैं। यहां मौजूद गर्मी और नमी इन तूफानों को दोबारा ताकत दे सकती है। इसके बाद ये चक्रवात का रूप ले सकते हैं।

तीसरा कारण मानसून के बाद हवाओं की दिशा है। भारत में मानसून खत्म होने के बाद चलने वाली हवाएं चक्रवातों को पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ने में मदद करती हैं। इस वजह से बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवात भारत के तटीय इलाकों को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, अरब सागर में बनने वाले कई चक्रवात भारत से दूर ओमान या मिडिल ईस्ट की दिशा में बढ़ जाते हैं।

Cyclone Murasu Alert: मुरासु और अर्नब चक्रवात से बदलेगा मौसम
मुरासु और अर्नब चक्रवात से बदलेगा मौसम
Cyclone Murasu Alert: मुरासु चक्रवात का किन राज्यों में पड़ेगा असर?

मुरासु चक्रवात के कारण 1 नवंबर से ही बंगाल की खाड़ी के आसपास के तटीय इलाकों में तेज बारिश और तूफानी हवाओं का असर देखा जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग यानी आईएमडी ने देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए मौसम संबंधी चेतावनी जारी की है।आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में 2 और 3 नवंबर को भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा तमिलनाडु, तेलंगाना, दक्षिणी ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, 7 नवंबर तक दक्षिण भारत के सभी राज्यों में बारिश हो सकती है। कुछ जगहों पर हल्की और छिटपुट बारिश होगी, जबकि कई इलाकों में बड़े क्षेत्र में बारिश होने की आशंका है।

मध्य भारत में तापमान गिरा, आंधी-बारिश का अनुमान

चक्रवात के असर से मध्य प्रदेश में पिछले 4 दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 7 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में 5 नवंबर तक बारिश होने का अनुमान है। इस दौरान कुछ जगहों पर आंधी-तूफान और बिजली गिरने की आशंका है। हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

Cyclone Murasu Alert: पूर्वी भारत में बारिश के साथ चलेंगी तेज हवाएं

ओडिशा के ज्यादातर हिस्सों में 2 से 4 नवंबर के बीच बारिश हो सकती है। इस दौरान हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है। पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के कुछ इलाकों में भी हल्की बारिश हो सकती है। बिहार में अगले कुछ दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में करीब 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है।

उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश और कोहरे का असर

2 नवंबर को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश होने का अनुमान है। अर्नब चक्रवात के असर से उत्तर प्रदेश में दिन के तापमान में 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। राज्य के 10 शहरों में कोहरा भी देखा गया है। मुरासु चक्रवात के कारण मौसम में इस तरह का बदलाव आगे भी बना रह सकता है।

Cyclone Murasu Alert: पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में भी बदलेगा मौसम

1 से 5 नवंबर के बीच गोवा, कोंकण, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में हल्की बारिश होने की संभावना है। इस दौरान आंधी-तूफान और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। इसके अलावा 1 से 3 नवंबर के बीच गुजरात के कुछ हिस्सों में भी बारिश का अनुमान है।पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों में भी मौसम बदल सकता है। अरुणाचल प्रदेश में 1 से 5 नवंबर तक बारिश होने का अनुमान है। वहीं, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कुछ इलाकों में 1 से 7 नवंबर के बीच बारिश हो सकती है।

Cyclone Murasu Alert: 9 राज्यों में बारिश का अलर्ट
9 राज्यों में बारिश का अलर्ट
क्या इन चक्रवातों का अल-नीनो से भी संबंध है?

बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवातों का अल-नीनो से भी संबंध माना जाता है। हालांकि, यह संबंध थोड़ा जटिल है। अल-नीनो चक्रवातों की संख्या और उनकी ताकत, दोनों को प्रभावित कर सकता है। इसके प्रभाव से हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी की ऊपरी सतह का तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। समुद्र का यह गर्म पानी चक्रवातों को ऊर्जा देता है।चक्रवाती सिस्टम समुद्र से गर्मी और नमी हासिल करता है। इस वजह से कभी-कभी सामान्य हवा का कम दबाव वाला क्षेत्र सिर्फ 24 से 36 घंटे में तेजी से मजबूत होकर भीषण चक्रवाती तूफान बन सकता है।

Cyclone Murasu Alert: अल-नीनो में चक्रवात कम

इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज और आंध्र यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 1995 से 2019 के बीच आए चक्रवातों पर अध्ययन किया था। इस रिसर्च के मुताबिक, 9 अल-नीनो वाले सालों में कुल 15 चक्रवात आए, जबकि 11 ला-नीना वाले सालों में 33 चक्रवात दर्ज किए गए। इससे पता चलता है कि अल-नीनो के दौरान चक्रवातों की संख्या कम हो सकती है, लेकिन उनकी रफ्तार और प्रभाव ज्यादा देखने को मिल सकता है।मौसम विशेषज्ञ डॉ. मृत्युंजय महापात्रा के मुताबिक, अल-नीनो वाले सालों में बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती सिस्टम भूमध्य रेखा के ज्यादा करीब बन सकते हैं। ऐसी स्थिति में चक्रवातों को समुद्र के ऊपर लंबा रास्ता तय करने का मौका मिलता है। इससे उनके ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बजाय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की ओर बढ़ने की संभावना ज्यादा हो सकती है।

इन चक्रवातों का भारत में ठंड पर क्या असर पड़ेगा?

उत्तर भारत के राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में ठंड की शुरुआत आमतौर पर हिमालय की ओर से आने वाली ठंडी और शुष्क हवाओं से होती है। लेकिन जब बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनते हैं, तो वे हवा और नमी को अपनी ओर खींचते हैं। इस तरह चक्रवात बड़े मॉइश्चर पंप यानी नमी खींचने वाले सिस्टम की तरह काम करते हैं।इसका असर यह होता है कि हिमालय से आने वाली ठंडी हवाओं की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। ये हवाएं मैदानी और मध्य भारत के इलाकों तक उतनी मजबूती से नहीं पहुंच पातीं। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, जब तक बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियां पूरी तरह शांत नहीं होतीं, तब तक उत्तर भारत से दक्षिण की ओर आने वाली ठंडी हवाएं मजबूती नहीं पकड़ पाएंगी। यह स्थिति दिसंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक बनी रह सकती है। चक्रवातों से आने वाली नमी खत्म होने के बाद ही शीतलहर चलने की संभावना मजबूत होगी।

Cyclone Murasu Alert: अल-नीनो के साल में कम पड़ सकती है ठंड

आईएमडी और पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोरोलॉजी की रिसर्च के मुताबिक, अल-नीनो वाले सालों में सर्दियों का तापमान सामान्य से 0.5 से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रह सकता है। इसका असर मैदानी इलाकों में शीतलहर पर भी पड़ता है। ऐसे सालों में शीतलहर चलने वाले दिनों की संख्या करीब आधी रह सकती है। यानी सामान्य परिस्थितियों की तुलना में ठंड का असर कम हो सकता है।