Delhi pollution: राजधानी दिल्ली को प्रदूषण से राहत दिलाने और सड़कों को बेहतर बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta की मौजूदगी में लोक निर्माण विभाग (PWD), CSIR-Central Road Research Institute और School of Planning and Architecture के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दिल्ली की सड़कों को धूल रहित बनाना, हरियाली बढ़ाना और वैज्ञानिक तरीके से सड़क प्रबंधन को मजबूत करना है। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री Parvesh Sahib Singh और Manjinder Singh Sirsa भी मौजूद रहे।
प्रदूषण नियंत्रण को मिलेगी नई ताकत
दिल्ली सरकार का मानना है कि यह पहल राजधानी में बढ़ते प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद करेगी। साथ ही सड़कों की गुणवत्ता और शहरी बुनियादी ढांचे में भी सुधार देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि नई तकनीक, बेहतर सड़क प्रबंधन और हरित विकास को केंद्र में रखकर शुरू की गई यह योजना दिल्ली को स्वच्छ और टिकाऊ शहर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी, सीएसआईआर-सीआरआरआई और एसपीए के बीच हुआ यह समझौता सड़कों को धूल मुक्त बनाने और प्रदूषण कम करने के प्रयासों को नई गति देगा।
Delhi pollution: दिल्ली में बनेंगे बांस से बने ‘कूलिंग जोन’
भीषण गर्मी से राहत देने के लिए दिल्ली सरकार ने एक और अनोखी पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में बांस आधारित ‘कूलिंग जोन’ विकसित किए जाएंगे, जहां लोग गर्मी से राहत पा सकेंगे। दरअसल, बाहरी-उत्तरी जिला प्रशासन ने SEEDS के सहयोग से बवाना इलाके में बांस से निर्मित एक कूलिंग जोन तैयार किया है। इसकी सफलता को देखते हुए सरकार अब इस मॉडल को अन्य स्थानों पर भी लागू करने की योजना बना रही है।
पर्यावरण के अनुकूल होगा मॉडल
Delhi pollution: मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, इन कूलिंग जोन का निर्माण मुख्य रूप से बांस से किया गया है, जिससे पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है। यह न केवल लोगों को तत्काल राहत देगा, बल्कि भविष्य में बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एक टिकाऊ समाधान भी साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल जलवायु चुनौतियों के बीच नवाचार आधारित समाधान विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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