Delimitation: केंद्र सरकार एक बार फिर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संवैधानिक विधेयक को संसद में लाने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि विधेयक को संशोधित स्वरूप में तैयार किया जा रहा है, जिसमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था प्रस्तावित की जा सकती है। हालांकि इस विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
क्या है परिसीमन और महिला आरक्षण का प्रस्ताव?
परिसीमन का अर्थ लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना होता है। जनसंख्या और अन्य मानकों के आधार पर समय-समय पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन किया जाता है। केंद्र सरकार की योजना नए परिसीमन के बाद महिला आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने की है। महिला आरक्षण के तहत संसद की कुल सीटों में से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
Delimitation: पहले क्यों नहीं पारित हो पाया था विधेयक?
अप्रैल 2026 में जब यह विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था, तब इसे आवश्यक समर्थन नहीं मिल सका था। मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े थे। संवैधानिक संशोधन होने के कारण इसे पारित कराने के लिए कम से कम 352 सांसदों का समर्थन आवश्यक था। पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण विधेयक आगे नहीं बढ़ पाया।
संसद में संख्या बल की स्थिति
वर्तमान समय में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों की संख्या 319 बताई जा रही है। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उसे अभी भी 33 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन के पास 208 सांसद हैं, जबकि कुछ निर्दलीय सांसद भी विपक्ष का समर्थन कर रहे हैं। राज्यसभा में सत्तापक्ष अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में माना जा रहा है, लेकिन लोकसभा में संख्या जुटाना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
Delimitation: सहयोगी दलों और अन्य दलों पर नजर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार की नजर उन दलों और सांसदों पर है जो किसी गठबंधन से मजबूती से जुड़े नहीं हैं। कुछ क्षेत्रीय दलों के समर्थन की संभावना भी जताई जा रही है। इसके अलावा विभिन्न दलों में संभावित राजनीतिक फेरबदल और समर्थन के नए समीकरण भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। आगामी संसद सत्र में यदि यह विधेयक पेश होता है तो इसकी सफलता काफी हद तक राजनीतिक समर्थन जुटाने की रणनीति पर निर्भर करेगी।
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