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5जी से सुपरकंप्यूटर तक, तकनीकी क्रांति के दम पर भारत ने वैश्विक मंच पर बनाई नई पहचान

डिजिटल इंडिया से तकनीकी महाशक्ति बना भारत

Digital India Growth: पिछले 12 वर्षों में भारत ने डिजिटल क्षेत्र में तेज़ और व्यापक बदलाव देखा है। पहले भारत को केवल एक बड़े डिजिटल उपभोक्ता बाजार के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर जैसी उन्नत तकनीकों में भी वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। डिजिटल इंडिया अभियान, तकनीकी नवाचारों और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के विस्तार ने भारत को दुनिया की प्रमुख डिजिटल शक्तियों में शामिल कर दिया है। यह जानकारी सोमवार को जारी एक आधिकारिक फैक्ट शीट में दी गई।

तकनीकी निवेश से मजबूत हुआ नवाचार तंत्र

फैक्ट शीट के अनुसार, सरकार ने पिछले एक दशक में तकनीकी बुनियादी ढांचे, अनुसंधान, स्टार्टअप्स और कौशल विकास पर लगातार निवेश किया है। इसके चलते देश में नवाचार का एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हुआ है। एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में मिशन मोड पर काम किया जा रहा है, जिससे भारत तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

साल 2015 में शुरू किए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने देश में डिजिटल बदलाव की मजबूत आधारशिला रखी। इस दौरान ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ और तेज़ इंटरनेट सेवाएं गांवों तक पहुंचीं। वर्ष 2019 में जहां ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की लंबाई 19.35 लाख रूट किलोमीटर थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 42.36 लाख रूट किलोमीटर हो गई।

Digital India Growth: डिजिटल इंडिया से तकनीकी महाशक्ति बना भारत
डिजिटल इंडिया से तकनीकी महाशक्ति बना भारत

5जी और इंटरनेट कनेक्टिविटी में बड़ी छलांग

भारत ने दुनिया के सबसे तेज़ 5जी नेटवर्क विस्तार में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्तमान में 5जी सेवाएं देश के लगभग 99.9 प्रतिशत जिलों तक पहुंच चुकी हैं। बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या 2014 के 25.15 करोड़ से बढ़कर 2026 में 102.86 करोड़ तक पहुंच गई है।

इसी तरह ब्रॉडबैंड कनेक्शनों में भी बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014 में जहां ब्रॉडबैंड कनेक्शन 6.1 करोड़ थे, वहीं दिसंबर 2025 तक यह संख्या बढ़कर 99.56 करोड़ हो गई। इंटरनेट की बढ़ती पहुंच ने शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

सस्ता इंटरनेट बना डिजिटल विकास का आधार

सरकार के अनुसार, डिजिटल विस्तार के पीछे इंटरनेट की कम होती लागत भी एक बड़ा कारण रही है। वर्ष 2014 में 1 जीबी डेटा की औसत कीमत 269 रुपये थी, जो अब घटकर केवल 8 से 10 रुपये प्रति जीबी रह गई है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति मासिक डेटा खपत 61.66 एमबी से बढ़कर 24.01 जीबी तक पहुंच गई है।

सस्ते इंटरनेट ने ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल बैंकिंग और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया है। इसके परिणामस्वरूप डिजिटल अर्थव्यवस्था का तेजी से विस्तार हुआ है और नई तकनीकों को अपनाने की गति भी बढ़ी है।

सुपरकंप्यूटिंग में बढ़ी भारत की ताकत

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) के तहत भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। 4,500 करोड़ रुपये के इस मिशन के अंतर्गत देश के प्रमुख संस्थानों में अब तक 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 47 पेटाफ्लॉप्स है।

इस मिशन की प्रमुख उपलब्धियों में स्वदेशी ‘परम रुद्र’ सुपरकंप्यूटर श्रृंखला का विकास शामिल है। भारतीय तकनीक से तैयार किए गए ये सुपरकंप्यूटर उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग के क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता को और मजबूत बना रहे हैं।

सेमीकंडक्टर निर्माण को मिला नया प्रोत्साहन

दिसंबर 2021 में शुरू किए गए 76,000 करोड़ रुपये के सेमीकंडक्टर इंडिया कार्यक्रम ने देश में चिप निर्माण उद्योग को नई दिशा दी है। इस योजना का उद्देश्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है।

इसके अलावा केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 की घोषणा भी की गई है। जून 2026 तक लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये की 12 बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें एक सेमीकंडक्टर फैब, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर यूनिट और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। इन परियोजनाओं से देश में चिप निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।

क्वांटम तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

सरकार ने अप्रैल 2023 में 6,003.65 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की शुरुआत की थी। यह मिशन क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसर और क्वांटम उपकरणों के विकास पर केंद्रित है।देश के प्रमुख संस्थानों में चार विशेष क्वांटम अनुसंधान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां 150 से अधिक शोधकर्ता कार्य कर रहे हैं। भारत ने 1,000 किलोमीटर लंबा सुरक्षित क्वांटम संचार नेटवर्क भी सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया है, जो तय समय से छह वर्ष पहले हासिल की गई उपलब्धि मानी जा रही है।

अमरावती में बनेगी पहली क्वांटम वैली

फरवरी 2026 में आंध्र प्रदेश के अमरावती में देश की पहली ‘क्वांटम वैली’ की आधारशिला रखी गई। यह केंद्र भविष्य में क्वांटम अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास का प्रमुख हब बनने की दिशा में काम करेगा।फैक्ट शीट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज दुनिया की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक है और भारत इस क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। सरकार ने वर्ष 2024 में 10,300 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ इंडिया एआई मिशन शुरू किया था।

इस मिशन का उद्देश्य एआई अनुसंधान, स्टार्टअप्स, कंप्यूटिंग क्षमता और कौशल विकास को बढ़ावा देना है। मार्च 2026 तक देश में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिनमें करीब 89 प्रतिशत किसी न किसी रूप में एआई तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।

एआई कोश और जीपीयू क्षमता पर फोकस

एआई मिशन के तहत 38,000 से अधिक जीपीयू क्षमता वाली साझा कंप्यूटिंग सुविधा विकसित की जा रही है। इसके अलावा ‘एआई कोश’ प्लेटफॉर्म पर 12,115 से अधिक डेटासेट और 306 एआई मॉडल उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे शोध, नवाचार और तकनीकी विकास को नई गति मिल रही है।

क्लाउड कंप्यूटिंग, एआई और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के चलते भारत का डेटा सेंटर उद्योग भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2020 में देश की डेटा सेंटर क्षमता लगभग 375 मेगावाट थी, जिसके 2025 तक बढ़कर 1,500 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।

सरकार के मुताबिक, मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर जैसे शहर प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहे हैं। इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में कई बड़े हाइपरस्केल और एआई-केंद्रित डेटा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं, जो देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को और मजबूत बनाएंगे।

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