Dhanteras: धनतेरस का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा के साथ यमराज के नाम से दीपदान करने की भी परंपरा है। इसे यम दीपदान या यम दीपक कहा जाता है। मान्यता है कि धनतेरस की शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाने से परिवार पर अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। साल 2026 में धनतेरस 6 नवंबर को मनाई जाएगी।
क्यों जलाया जाता है यमराज के नाम का दीपक?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के लिए दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। इस परंपरा के पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कथा के अनुसार, राजा हेम के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग था। पत्नी ने पति की जान बचाने के लिए घर के दरवाजे पर सोने-चांदी के आभूषण और दीपक रख दिए। दीपों की रोशनी और गीत-संगीत से यमराज का ध्यान भटक गया और राजकुमार की जान बच गई। तभी से यम दीपदान की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।
Dhanteras: चौमुखी दीपक जलाने का क्या है महत्व?
धनतेरस पर यमराज के नाम से चार बत्तियों वाला दीपक जलाने की परंपरा है। इसे चौमुखी दीपक कहा जाता है। इसमें चार दिशाओं की ओर चार बत्तियां रखी जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपक की रोशनी जीवन से अंधकार और नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक है। इस दिन मिट्टी के दीपक में सरसों का तेल डालकर उसे जलाने की परंपरा भी बताई जाती है।
किस दिशा में रखना चाहिए यम दीपक?
परंपरा के अनुसार, यम दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखकर जलाया जाता है। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है। दीपक रखते समय उसका मुख दक्षिण दिशा की तरफ रखने की मान्यता है। कुछ परंपराओं में दीपक को घर के बाहर ऐसी जगह रखने की सलाह दी जाती है, जहां उसकी लौ सुरक्षित रहे।
Dhanteras: धनतेरस पर यम दीपक जलाने का सही समय
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन प्रदोष काल शाम 5:32 बजे से रात 8:09 बजे तक बताया गया है। वहीं धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक है। यम दीपदान के लिए प्रदोष काल का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और पंचांग के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।
यम दीपदान करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
यम दीपदान के लिए मिट्टी का चौमुखी दीपक, सरसों का तेल और चार बत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। दीपक जलाते समय यमराज से परिवार की रक्षा और लंबी आयु की प्रार्थना की जाती है। धार्मिक परंपरा में दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखने की बात कही गई है। पूजा के दौरान स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखना चाहिए। यम दीपदान की ये परंपराएं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
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