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दिल्ली: ईडी की बड़ी कार्रवाई, फ्लैट निर्माण कंपनी की 51 करोड़ की संपत्ति जब्त

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ED action Delhi: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फ्लैट निर्माण से जुड़ी एक कंपनी की करीब 51 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई घर खरीदारों से जुटाए गए धन के कथित दुरुपयोग और समय पर फ्लैट न सौंपने के मामले में की गई है।

पीएमएलए के तहत की गई कुर्की

ईडी ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय ने ओसियन सेवन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड (OSBPL) से जुड़ी चल और अचल संपत्तियों को कुर्क किया है।

ED action Delhi: होटल, विला और जमीनें शामिल

जब्त की गई संपत्तियों में कुल 51.57 करोड़ रुपये की संपत्ति शामिल है। इनमें से करीब 49.79 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां हैं, जिनमें एक विला, होटल व रिसॉर्ट, कार्यालय परिसर और गुरुग्राम, हिमाचल प्रदेश तथा महाराष्ट्र में स्थित कई भूमि भूखंड शामिल हैं। इसके अलावा 1.78 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां भी जब्त की गई हैं।

घर खरीदारों के पैसे का दुरुपयोग

ईडी की जांच में सामने आया है कि कंपनी ने किफायती आवास परियोजनाओं के नाम पर बड़ी संख्या में घर खरीदारों से धन एकत्र किया था, लेकिन उस रकम का इस्तेमाल तय परियोजनाओं में करने के बजाय अन्य कार्यों में किया गया। नतीजतन कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं और फ्लैटों की डिलीवरी में भारी देरी हुई।

ED action Delhi: मनमाने ढंग से रद्द हुए आवंटन

जांच एजेंसी के अनुसार, कई मामलों में फ्लैटों का आवंटन बिना ठोस कारण के रद्द कर दिया गया, जिससे घर खरीदारों को लंबे समय तक अनिश्चितता और भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।

प्रमोटर की अहम भूमिका उजागर

ईडी ने बताया कि कंपनी के प्रमोटर और प्रमुख निर्णयकर्ता स्वराज सिंह यादव ने इस पूरी योजना को अंजाम देने में केंद्रीय भूमिका निभाई। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि घर खरीदारों से निर्माण के लिए जुटाए गए फंड को जानबूझकर अन्य उद्देश्यों में खर्च किया गया।

कई एफआईआर के बाद शुरू हुई जांच

यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर सामने आया। इन एफआईआर में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन्हीं के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। ईडी ने संकेत दिए हैं कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे और भी कार्रवाई की जा सकती है।

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