Mahua Moitra: महिला आरक्षण कानून 2023 को लेकर केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के नेताओं ने इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार इस मुद्दे को अन्य प्रक्रियाओं से जोड़कर भ्रम पैदा कर रही है, जबकि यह कानून पहले ही पारित हो चुका है।
महुआ मोइत्रा का सरकार पर तीखा तंज
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने अधिसूचना को “गलतियों की हास्य कथा” करार दिया। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं इतनी भी नासमझ नहीं हैं कि पारित हो चुके कानून को किसी अन्य प्रक्रिया से जोड़ दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन और जनगणना जैसे अलग-अलग मुद्दों को महिला आरक्षण कानून से जोड़ने की कोशिश कर रही है, जो पूरी तरह अनुचित है।
Mahua Moitra: परिसीमन और जनगणना को लेकर उठे सवाल
महुआ मोइत्रा ने कहा कि सरकार पहले इस कानून को जनगणना पर आधारित बता चुकी है, लेकिन अब 2011 की जनगणना का हवाला दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन महिला आरक्षण विधेयक का हिस्सा नहीं है, फिर भी इसे उससे जोड़ा जा रहा है। उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया में भ्रम पैदा करने का प्रयास है।
कीर्ति झा आजाद ने समय को लेकर जताई आपत्ति
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति झा आजाद ने इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश में महत्वपूर्ण चुनाव चल रहे हैं और कई सांसद व्यस्त हैं, तो इस समय संशोधन बिल लाने की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि इसे कुछ दिनों बाद भी लाया जा सकता था, लेकिन सरकार ने जल्दबाजी दिखाई, जिससे इसके पीछे राजनीतिक उद्देश्य नजर आते हैं।
Mahua Moitra: कांग्रेस नेताओं ने भी साधा निशाना
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि सरकार को पहले जनगणना करानी चाहिए, फिर परिसीमन आयोग का गठन कर सभी प्रक्रियाएं पूरी करनी चाहिए। वहीं, कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने कहा कि यह महिलाओं के आरक्षण का नहीं बल्कि परिसीमन से जुड़ा विधेयक है। उन्होंने सरकार से स्पष्टता की मांग करते हुए कहा कि देश में इस मुद्दे को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष के इन आरोपों के बीच महिला आरक्षण कानून को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।








