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5 मई को एकदंत संकष्टी चतुर्थी का विशेष दिन, जान लें अभिजित और विजय मुहूर्त का शुभ योग

एकदंत संकष्टी चतुर्थी

Ekadant Sankashti Chaturthi: भगवान श्री गणेश को समर्पित पवित्र एकदंत संकष्टी चतुर्थी का पर्व 5 मई (मंगलवार) को मनाया जाएगा। यह व्रत वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है। इस दिन भगवान गणेश के एकदंत स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

एकदंत संकष्टी चतुर्थी
एकदंत संकष्टी चतुर्थी

एकदंत गणेश की कथा और महत्व

भगवान एकदंत को गणेश जी के अष्टविनायक स्वरूपों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश जब भगवान शिव से मिलने जा रहे थे, तब भगवान परशुराम ने उन्हें रोक दिया। दोनों के बीच विवाद हुआ और परशुराम ने अपने परशु से प्रहार किया, जिससे गणेश जी का एक दांत टूट गया। तभी से वे “एकदंत” कहलाए। मान्यता है कि इस दिन उनकी पूजा करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और सफलता, बुद्धि, विद्या तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन गणपति को मोदक, लड्डू और दुर्वा चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।

एकदंत संकष्टी चतुर्थी
एकदंत संकष्टी चतुर्थी

पूजा और शुभ समय

इस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 37 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 59 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 10 बजकर 35 मिनट पर रहेगा। चतुर्थी तिथि पूरी रात बनी रहेगी। ज्येष्ठा नक्षत्र दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक और शिव योग रात 12 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।

Ekadant Sankashti Chaturthi: शुभ मुहूर्त

  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 32 मिनट से 3 बजकर 25 मिनट तक

इन दोनों मुहूर्तों को बहुत शुभ माना जाता है। इस समय में किए गए कार्य सफल होते हैं। गणेश पूजा, नया कार्य शुरू करने या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए यह समय उत्तम माना जाता है।

Ekadant Sankashti Chaturthi: एकदंत संकष्टी चतुर्थी
एकदंत संकष्टी चतुर्थी

अन्य महत्वपूर्ण समय

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 12 मिनट से 4 बजकर 55 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 6 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 19 मिनट तक
  • राहुकाल: दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से शाम 5 बजकर 19 मिनट तक (इस समय कोई शुभ कार्य न करें)
  • यमगंड काल: सुबह 8 बजकर 58 मिनट से 10 बजकर 38 मिनट तक

यह दिन भगवान गणेश की कृपा पाने और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

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