Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन भक्त भगवान गणेश के जन्मोत्सव को बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। गणेश चतुर्थी का उत्सव आमतौर पर 10 दिनों तक चलता है। इस दौरान श्रद्धालु गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और कई लोग व्रत भी रखते हैं। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश से जुड़ी पौराणिक कथा पढ़ने और सुनने का भी विशेष महत्व माना जाता है।
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी व्रत कथा
भगवान गणेश के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा काफी रोचक है। मान्यता के अनुसार, गणेश जी का जन्म माता पार्वती के संकल्प से हुआ था। एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। उस समय उनके घर के बाहर कोई ऐसा पहरेदार नहीं था, जो किसी को अंदर आने से रोक सके। तब माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन यानी मैल से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। इसी तरह बालक गणेश का जन्म हुआ।इसके बाद माता पार्वती ने गणेश जी को आदेश दिया कि जब तक वह स्नान करके वापस न आएं, तब तक किसी को भी घर के अंदर प्रवेश न करने दें। माता की आज्ञा मानकर बालक गणेश द्वार पर पहरा देने लगे।

शिव जी और गणेश जी के बीच हुआ युद्ध
कुछ समय बाद भगवान शिव वहां पहुंचे और घर के अंदर जाने लगे। लेकिन गणेश जी ने उन्हें रोक दिया। भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि वह माता पार्वती के पति हैं और उन्हें अंदर जाने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, गणेश जी अपनी माता के आदेश पर अडिग रहे और उन्होंने शिव जी को अंदर जाने नहीं दिया।कई देवी-देवताओं ने भी गणेश जी को समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं मानी। इसके बाद भगवान शिव और बालक गणेश के बीच युद्ध शुरू हो गया। क्रोध में आकर भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर उनके धड़ से अलग कर दिया।
Ganesh Chaturthi 2026: माता पार्वती ने लिया सृष्टि के विनाश का संकल्प
जब माता पार्वती स्नान करके बाहर आईं तो उन्होंने अपने पुत्र को मृत अवस्था में देखा। यह देखकर वह बहुत दुखी और क्रोधित हो गईं। उन्होंने पूरी सृष्टि का विनाश करने का संकल्प ले लिया। माता पार्वती के इस रूप से सभी देवी-देवता भयभीत हो गए।तब माता पार्वती को शांत करने और बालक गणेश को दोबारा जीवित करने के लिए भगवान शिव ने निर्णय लिया। उन्होंने अपने गणों को आदेश दिया कि वे उत्तर दिशा की ओर जाएं और ऐसी माता के बच्चे का सिर लेकर आएं, जो अपने बच्चे की तरफ पीठ करके सोई हो।

हाथी के सिर से हुआ गणेश जी का पुनर्जन्म
भगवान शिव के आदेश पर गण सिर की तलाश में निकल पड़े। काफी प्रयास के बाद उन्हें एक हथिनी मिली, जो अपने बच्चे की तरफ पीठ करके सो रही थी। गण उसके बच्चे का सिर लेकर भगवान शिव के पास पहुंचे।इसके बाद भगवान शिव ने हाथी का मस्तक बालक गणेश के धड़ पर रख दिया और उन्हें फिर से जीवित कर दिया। अपने पुत्र को जीवित देखकर माता पार्वती प्रसन्न हो गईं।इसके बाद भगवान शिव सहित सभी देवी-देवताओं ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया। भगवान शिव ने कहा कि अब से किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा से होगी। इसी वजह से भगवान गणेश को ‘प्रथम पूज्य’ कहा जाता है। आज भी पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत भगवान गणेश की आराधना से की जाती है।
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी 2026 पूजा मुहूर्त
गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा।
- गणेश चतुर्थी पूजा और स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक रहेगा।
- गणेश चतुर्थी पर वर्जित चंद्रदर्शन का समय सुबह 09:06 बजे से रात 08:04 बजे तक रहेगा।
- गणेश चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 07:06 बजे से 15 सितंबर की सुबह 07:44 बजे तक रहेगी।
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश स्थापना और पूजा विधि
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद जिस स्थान पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करनी है, उसे अच्छी तरह साफ कर लें। वहां एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। चौकी पर थोड़े अक्षत डालें।इसके बाद गणपति बप्पा की प्रतिमा को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके चौकी पर स्थापित करें। सबसे पहले प्रतिमा पर गंगाजल का छिड़काव करें। प्रतिमा के पास एक कलश भी रखें। कलश में आम के पत्ते, सिक्का, अक्षत और सुपारी डालें। इसके बाद कलश पर मौली बांधें और उसके ऊपर नारियल रखें।
अब घी का दीपक जलाएं। गणेश जी की प्रतिमा और कलश पर टीका लगाएं और फूल अर्पित करें। इसके बाद भगवान को दूर्वा और अक्षत चढ़ाएं। फल, मोदक, मिठाई आदि चीजों का भोग लगाएं।भगवान गणेश की पूजा करते समय “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। परिवार के साथ गणेश जी की आरती करें और हाथ जोड़कर बप्पा से जीवन के सभी विघ्न दूर करने की प्रार्थना करें।घर में जितने दिनों तक गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित रहे, उतने दिनों तक सुबह और शाम भगवान को भोग लगाएं और उनकी आरती करें।

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर लगाएं ये भोग
गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश को उनकी पसंद के अनुसार कई तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है। भोग में इन चीजों को शामिल कर सकते हैं:
- मोदक
- बेसन के लड्डू
- तिल-गुड़ के लड्डू
- सूजी का हलवा
- पंचामृत
- नारियल के लड्डू
- केसरिया खीर
- फल
गणपति स्थापना के मंत्र
ॐ गं गणपतये सर्व कार्य सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा ॥
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
ॐ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥
गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।








