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जनगणना 2027: दूसरे चरण में कैसे होगी आबादी की गिनती? पहली बार क्या बदलेगा, जानें पूरी प्रक्रिया

जनगणना 2027: 11 नए सवाल जुड़े, जानें क्या बदला
जनगणना 2027: 11 नए सवाल जुड़े, जानें क्या बदला

India Census 2027: कुछ महीने पहले आपके घर भी जनगणना के अधिकारी आए होंगे। इस दौरान उन्होंने मकान, पानी, बिजली और इंटरनेट जैसी सुविधाओं से जुड़े कई सवाल पूछे होंगे। अब सरकार ने जनगणना 2027 के दूसरे चरण का कार्यक्रम जारी कर दिया है। ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल हैं। क्या जनगणना अधिकारी दोबारा घर आएंगे? इस बार परिवार के सदस्यों से जुड़ी कौन-सी नई जानकारियां मांगी जाएंगी? क्या घर बैठे ऑनलाइन फॉर्म भरा जा सकता है? आइए, जनगणना 2027 की पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझते हैं।

India Census 2027: जनगणना 2027 का पूरा कार्यक्रम क्या है?

देश में जनगणना का काम दो चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में मकानों की गिनती और उनमें उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई गई। यह प्रक्रिया अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच पूरी की गई। अब दूसरे चरण में जनसंख्या की गणना होगी। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, ज्यादातर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह काम 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक किया जाएगा। इसके बाद 1 से 5 मार्च 2027 तक दोबारा जांच और सुधार की प्रक्रिया चलेगी। इससे पहले 10 से 24 जनवरी 2027 के बीच लोग घर बैठे ऑनलाइन स्व-गणना कर सकेंगे। हालांकि, कुछ राज्यों और क्षेत्रों के लिए जनगणना की तारीखें अलग तय की गई हैं।

इन राज्यों में अलग समय पर होगी जनगणना

मणिपुर, गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में सामान्य कार्यक्रम के अनुसार जनवरी-फरवरी 2027 में जनगणना नहीं होगी। इसके अलावा लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बर्फीले इलाकों में भी अलग समय पर यह काम किया जाएगा। मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण स्थिति सामान्य नहीं है। इसी वजह से वहां जनगणना का काम अगली अधिसूचना जारी होने तक टाल दिया गया है। वहीं, गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए इन राज्यों के लिए अलग तारीखें तय की गई हैं।लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कुछ ऊंचाई वाले इलाकों में भी जनगणना बाद में होगी। इनमें लाहौल-स्पीति और किन्नौर के पहाड़ी क्षेत्र शामिल हैं। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यहां सड़कें बंद हो जाती हैं। ऐसे में जनगणना कर्मचारियों को घर-घर पहुंचने में परेशानी होती है। इन राज्यों में से उत्तर प्रदेश का कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। बाकी राज्यों और क्षेत्रों के लिए अलग अधिसूचना जारी होने का इंतजार है।

India Census 2027: उत्तर प्रदेश में कब घर आएंगे जनगणना कर्मचारी?

उत्तर प्रदेश में जनगणना का दूसरा चरण दिसंबर 2026 से शुरू होगा। यहां 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक कर्मचारी घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों की जानकारी जुटाएंगे। इसके लिए लोगों को 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक ऑनलाइन स्व-गणना करने का मौका मिलेगा। जो लोग ऑनलाइन फॉर्म भरेंगे, जनगणना कर्मचारी उनके घर पहुंचकर दी गई जानकारी की जांच करेंगे। इसके बाद 5 से 9 जनवरी 2027 तक जानकारी के पुनरीक्षण का काम किया जाएगा।

क्या घर बैठे खुद भर सकते हैं जनगणना का फॉर्म?

हां, इस बार सरकार ने लोगों को स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा दी है। इसके तहत आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर की मदद से घर बैठे मकान और परिवार से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं। इसका मतलब है कि आपको फॉर्म भरने के लिए जनगणना कर्मचारी के घर आने का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, ऑनलाइन फॉर्म भरना अनिवार्य नहीं है। आप चाहें तो कर्मचारी के घर आने पर भी अपनी जानकारी दे सकते हैं।

India Census 2027: ऑनलाइन स्व-गणना फॉर्म कैसे भरें?

ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर में इंटरनेट ब्राउजर खोलें और जनगणना विभाग के सेल्फ एन्यूमरेशन पोर्टल पर जाएं। जनगणना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भी स्व-गणना का विकल्प चुन सकते हैं। पोर्टल पर अपना राज्य या केंद्रशासित प्रदेश चुनने के बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाला कैप्चा भरें। इसके बाद परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें। आपके मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा, जिसे भरकर मोबाइल नंबर का सत्यापन करना होगा।लॉग इन करने के बाद आपको अपने जिले, गांव या शहर और पिनकोड की जानकारी देनी होगी। इसके बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाले नक्शे में अपने घर की सही जगह चुनकर उसे मार्क करें। आगे आपको परिवार और घर से जुड़े 40 सवालों के जवाब देने होंगे। सभी जानकारियां भरने के बाद प्रीव्यू विकल्प पर क्लिक करके फॉर्म को अच्छी तरह जांच लें। अगर कोई गलती दिखाई देती है तो उसे ठीक करें और इसके बाद फाइनल सबमिट पर क्लिक कर दें।

फॉर्म जमा करने के बाद SE ID का क्या करना होगा?

ऑनलाइन फॉर्म सफलतापूर्वक जमा होने के बाद आपको 11 अंकों की एक विशेष पहचान संख्या मिलेगी, जिसे एसई आईडी (SE ID) कहा जाता है। इसे संभालकर रखना जरूरी है। आप इसका स्क्रीनशॉट ले सकते हैं या प्रिंट निकालकर सुरक्षित रख सकते हैं। जब जनगणना कर्मचारी आपके घर आएंगे तो आपको यह आईडी उन्हें दिखानी होगी। इसके आधार पर कर्मचारी ऑनलाइन भरी गई जानकारी का मिलान और सत्यापन कर सकेंगे।

India Census 2027: 11 नए सवाल जुड़े, जानें क्या बदला
जनगणना 2027: 11 नए सवाल जुड़े, जानें क्या बदला
India Census 2027: ऑनलाइन फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें ध्यान

स्व-गणना फॉर्म भरते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। एक मोबाइल नंबर से केवल एक घर का स्व-गणना फॉर्म भरा जा सकता है। फॉर्म में सभी जानकारियां सही और पूरी भरें। फॉर्म जमा करने से पहले हर जवाब को अच्छी तरह जांच लें। ध्यान रखें कि स्व-गणना करना अनिवार्य नहीं है। अगर आप ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरना चाहते हैं तो जनगणना कर्मचारी के घर आने पर भी जानकारी दे सकते हैं।

दूसरे चरण में कौन-कौन से 40 सवाल पूछे जाएंगे?

जनगणना के पहले चरण में मकान और वहां मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली गई थी। वहीं, दूसरे चरण में परिवार के प्रत्येक सदस्य से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारियां जुटाई जाएंगी। इस बार जनगणना में कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे, जबकि 2011 की जनगणना में 29 सवाल थे। यानी पिछली बार के मुकाबले इस बार 11 नए सवाल शामिल किए गए हैं।

इन सवालों में परिवार के सदस्यों की जाति, धर्म, माता-पिता और पति या पत्नी का नाम, घोषित राष्ट्रीयता और स्थायी पते से जुड़ी जानकारी मांगी जाएगी। इसके अलावा लोगों की डिजिटल साक्षरता, शिक्षा का स्तर और परिवार में मौजूद कुल बैंक खातों की संख्या के बारे में भी सवाल होंगे। कुछ अन्य सवालों में मोबाइल नंबर, आधार कार्ड और वोटर आईडी नंबर, कोविड-19 का टीका कहां लगवाया था, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस होने या न होने जैसी जानकारियां भी शामिल हैं।

India Census 2027: इस बार डिजिटल तरीके से कैसे होगी जनगणना?

जनगणना 2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी। इसके लिए सरकार ने चार प्रमुख डिजिटल व्यवस्थाएं तैयार की हैं। पहली व्यवस्था जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली है। इस डिजिटल पोर्टल के जरिए जनगणना के पूरे काम पर नजर रखी जाएगी। अधिकारी जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर यह देख सकेंगे कि किस क्षेत्र में कितना काम पूरा हुआ है और कहां कितना काम बाकी है।

दूसरी व्यवस्था मकान सूचीकरण के लिए मोबाइल एप है। जनगणना कर्मचारी घरों और परिवारों की जानकारी दर्ज करने के लिए इस एप का इस्तेमाल करेंगे। खास बात यह है कि यह एप बिना इंटरनेट के भी काम कर सकेगा। अगर किसी इलाके में इंटरनेट की सुविधा नहीं है तो कर्मचारी उसमें जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इंटरनेट उपलब्ध होने पर यह जानकारी सरकारी सर्वर पर भेज दी जाएगी। यह एप एंड्रॉयड और आईफोन दोनों पर काम करेगा और इसे 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा।

तीसरी व्यवस्था के तहत मकानों और क्षेत्रों की डिजिटल पहचान की जाएगी। इसके लिए डिजिटल नक्शे तैयार होंगे, जिनमें उपग्रह से ली गई तस्वीरों की भी मदद ली जाएगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई गांव, मोहल्ला या इलाका जनगणना से छूट न जाए। साथ ही किसी क्षेत्र या मकान की दोबारा गिनती होने की संभावना भी कम की जा सके।

चौथी व्यवस्था स्व-गणना पोर्टल है। इसके जरिए आम लोग अपने घर और परिवार की जानकारी खुद ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। फॉर्म जमा होने के बाद उन्हें एक विशेष पहचान संख्या दी जाएगी। बाद में जनगणना कर्मचारी इसी पहचान संख्या के आधार पर ऑनलाइन दी गई जानकारी का सत्यापन करेंगे।

जनगणना में दी गई आपकी जानकारी कितनी सुरक्षित रहेगी?

जनगणना के दौरान लोगों से उनके परिवार और निजी जीवन से जुड़ी कई जानकारियां मांगी जाती हैं। ऐसे में इन आंकड़ों की सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। सरकार के अनुसार, डिजिटल माध्यम से इकट्ठा किए गए आंकड़ों को एन्क्रिप्ट किया जाएगा। इसका मतलब है कि जानकारी को एक सुरक्षित कोड के रूप में रखा जाएगा, ताकि कोई अनधिकृत व्यक्ति उसे पढ़ न सके। इन आंकड़ों को सुरक्षित सरकारी डेटा केंद्रों में रखा जाएगा। साथ ही उनकी सुरक्षा की नियमित रूप से जांच भी की जाएगी।

इसके अलावा जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 15 के तहत लोगों की ओर से दी गई व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता सुनिश्चित की गई है। इस कानून के अनुसार, जनगणना के दौरान किसी व्यक्ति की ओर से दी गई निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। इसे सूचना का अधिकार कानून के तहत भी हासिल नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं, इस जानकारी को अदालत में सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

India Census 2027: जनगणना 2027 के आंकड़े कब जारी होंगे?

सरकार का लक्ष्य डिजिटल तकनीक की मदद से जनगणना के आंकड़े जुटाने, उनकी जांच करने और उनका विश्लेषण करने की प्रक्रिया को पहले से तेज बनाना है। इसके अलावा आंकड़ों को आम लोगों के लिए आसान बनाने के लिए चार्ट और चित्रों के जरिए भी जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है। हालांकि, सरकार ने अभी तक जनगणना 2027 के अंतिम आंकड़े जारी करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है।