
नई दिल्ली: कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ₹84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन’ योजना (Samudra Manthan Scheme) को मंजूरी दी गई है। यह केंद्र क्षेत्र की योजना देश के गहरे और अति-गहरे समुद्री इलाकों में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देगी।
सरकार के मुताबिक, इस योजना का Phase-I 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगा। इसका उद्देश्य आधुनिक भूकंपीय डेटा जुटाने, डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन वेल की ड्रिलिंग, साझा ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और तेल-गैस क्षेत्र से जुड़े घरेलू मैन्युफैक्चरिंग एवं सर्विस इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
Samudra Manthan Scheme क्या है?
Samudra Manthan Scheme यानी National Offshore Exploration Scheme, भारत के समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस के नए भंडार खोजने के लिए शुरू की गई एक बड़ी केंद्रीय योजना है। इसके तहत सरकार डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में खोज और ड्रिलिंग के जोखिम को कम करने के लिए वित्तीय सहायता देगी।
सरकार के अनुसार, गहरे समुद्र में तेल-गैस की खोज बेहद महंगी और जोखिम वाली प्रक्रिया है। इसलिए योजना के तहत पात्र डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन वेल की ड्रिलिंग लागत का 50 फीसदी तक या प्रति कुआं अधिकतम ₹675 करोड़, जो भी कम हो, सरकारी सहायता के रूप में दिया जाएगा। इससे निजी निवेश को आकर्षित करने और नए क्षेत्रों में खोज तेज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
₹84,084 करोड़ कहां खर्च होंगे?
सरकार ने योजना के कुल बजट को अलग-अलग हिस्सों में बांटा है। इसका सबसे बड़ा हिस्सा समुद्र में खोज और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर खर्च होगा।
60 डीपवॉटर कुओं की होगी ड्रिलिंग
योजना के तहत 60 डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन वेल की ड्रिलिंग की जाएगी। इसके लिए ₹43,200 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
समुद्र से जुटाया जाएगा आधुनिक डेटा
ऑफशोर सीस्मिक डेटा जुटाने और उसे प्रोसेस करने के लिए ₹28,534 करोड़ रखे गए हैं। इसमें 2D और 3D सीस्मिक डेटा के साथ मौजूदा डेटा की दोबारा प्रोसेसिंग और AI टूल्स के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जाएगा।
कॉमन ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹10,000 करोड़
तेल और गैस की खोज के बाद उसके व्यावसायिक उत्पादन को आसान बनाने के लिए ₹10,000 करोड़ की लागत से कॉमन ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर हब विकसित किए जाएंगे।
Oil & Gas Manufacturing Zones के लिए ₹2,000 करोड़
तेल और गैस क्षेत्र में जरूरी उपकरणों और सेवाओं का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण उपकरणों और सेवाओं में घरेलू क्षमता तथा स्थानीयकरण को बढ़ावा देना है।
भारत को समुद्र में तेल-गैस की खोज की जरूरत क्यों है?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है। देश का सालाना कच्चे तेल का आयात बिल करीब 144 अरब डॉलर यानी लगभग ₹13 लाख करोड़ है। ऐसे में घरेलू स्तर पर तेल और गैस का उत्पादन बढ़ाना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत की ऊर्जा मांग आने वाले वर्षों में बढ़ने की उम्मीद है। अगर घरेलू तेल और गैस उत्पादन में इजाफा होता है तो इससे आयात पर निर्भरता घटाने और ऊर्जा आपूर्ति को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है।
भारत के कौन से समुद्री क्षेत्र अहम हैं?
सरकार ने भारत के भविष्य के हाइड्रोकार्बन भंडार के लिहाज से कई डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बताया है। इनमें कृष्णा-गोदावरी, कावेरी, महानदी और अंडमान क्षेत्र प्रमुख हैं।
इन क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज के लिए आधुनिक तकनीक, भारी निवेश और लंबी अवधि की जरूरत होती है। सरकार के अनुसार एक डीपवॉटर एक्सप्लोरेटरी वेल की लागत करीब 125 से 150 मिलियन डॉलर तक हो सकती है।
निजी कंपनियों के लिए Deep Sea Oil Exploration क्यों मुश्किल है?
गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज में जोखिम काफी ज्यादा होता है। किसी क्षेत्र में करोड़ों-अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी यह जरूरी नहीं कि वहां व्यावसायिक मात्रा में तेल या गैस मिल ही जाए।
इसके अलावा डीपवॉटर ड्रिलिंग के लिए अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता की जरूरत होती है। इसी वजह से सरकार ने risk-sharing model अपनाया है। ड्रिलिंग लागत में वित्तीय सहायता देकर सरकार खोज के जोखिम को कम करना चाहती है, जिससे घरेलू और निजी निवेश को बढ़ावा मिल सके।
भारत का कितना समुद्री क्षेत्र तेल-गैस की खोज के लिए खुला?
सरकार के मुताबिक, पहले जिन समुद्री क्षेत्रों को ‘No-Go’ क्षेत्र के तौर पर सीमित किया गया था, उनमें से 99 फीसदी से ज्यादा क्षेत्र अब हटाए जा चुके हैं। इसके बाद भारत के Exclusive Economic Zone यानी EEZ के 10 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को पहली बार एक्सप्लोरेशन के लिए उपलब्ध कराया गया है।
इससे देश के उन समुद्री इलाकों में भी तेल और गैस की खोज की संभावना बढ़ी है, जहां पहले एक्सप्लोरेशन गतिविधियां सीमित थीं।
Samudra Manthan Scheme से कितना फायदा होगा?
सरकार ने योजना के सफल रहने की स्थिति में घरेलू तेल और गैस उत्पादन को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, घरेलू उत्पादन करीब 62 MMTOE से बढ़कर 80 MMTOE सालाना हो सकता है।
इसके साथ ही देश के हाइड्रोकार्बन रिसोर्स बेस को करीब 1.6 बिलियन TOE से बढ़ाकर 2.2 बिलियन TOE करने का लक्ष्य है।
सरकार का अनुमान है कि अतिरिक्त उत्पादन से कच्चे तेल के आयात में हर साल करीब ₹1 लाख करोड़ तक की कमी आ सकती है। हालांकि यह लक्ष्य खोज की सफलता और उत्पादन शुरू होने पर निर्भर करेगा।
तेल-गैस की खोज में कितना समय लग सकता है?
डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन का नतीजा तुरंत नहीं मिलता। सरकार के मुताबिक, किसी एक्सप्लोरेशन ब्लॉक के आवंटन से लेकर व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने तक सामान्य तौर पर 5 से 10 साल लग सकते हैं।
इसके अलावा मौजूदा तेल और गैस क्षेत्रों में उत्पादन प्राकृतिक रूप से हर साल करीब 6-7 फीसदी घटता है। इसलिए भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार नए भंडार की खोज जरूरी है।
Samudra Manthan Scheme से भारत की Energy Security कैसे मजबूत होगी?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और आपूर्ति से जुड़े जोखिमों का असर कम किया जा सकता है।
Samudra Manthan Scheme का फोकस केवल नए तेल और गैस भंडार खोजने तक सीमित नहीं है। सरकार आधुनिक डेटा, डीपवॉटर ड्रिलिंग, साझा इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को एक साथ बढ़ावा देकर पूरे ऑफशोर एक्सप्लोरेशन इकोसिस्टम को मजबूत करना चाहती है।
योजना में जोखिम भी कम नहीं
समुद्र में तेल और गैस की खोज एक लंबी और जोखिम भरी प्रक्रिया है। भारी निवेश के बावजूद किसी कुएं से व्यावसायिक मात्रा में तेल या गैस मिलने की गारंटी नहीं होती। इसके अलावा डीपवॉटर प्रोजेक्ट में तकनीकी चुनौतियां और लंबी समयसीमा भी होती है।
इसी वजह से ₹84,084 करोड़ की Samudra Manthan Scheme को तत्काल तेल उत्पादन बढ़ाने वाली योजना के बजाय दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
Samudra Manthan Scheme: एक नजर में
- योजना का नाम: Samudra Manthan – National Offshore Exploration Scheme
- कुल आउटले: ₹84,084 करोड़
- Phase-I: 31 मार्च 2031 तक
- डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन वेल: 60
- ड्रिलिंग के लिए आवंटन: ₹43,200 करोड़
- ऑफशोर डेटा के लिए: ₹28,534 करोड़
- कॉमन ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर: ₹10,000 करोड़
- Oil & Gas Manufacturing Zones: ₹2,000 करोड़
- सरकारी ड्रिलिंग सहायता: पात्र लागत का 50% तक या ₹675 करोड़ प्रति कुआं, जो भी कम हो
- घरेलू तेल-गैस उत्पादन लक्ष्य: 62 से बढ़ाकर 80 MMTOE सालाना
- संभावित आयात बचत: करीब ₹1 लाख करोड़ सालाना तक, खोज और उत्पादन सफल रहने पर।
Samudra Manthan Scheme FAQs
Samudra Manthan Scheme क्या है?
यह केंद्र सरकार की National Offshore Exploration Scheme है, जिसका उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज और उत्पादन को बढ़ावा देना है।
Samudra Manthan Scheme का बजट कितना है?
इस योजना का कुल Phase-I outlay ₹84,084 करोड़ है और इसे 31 मार्च 2031 तक लागू किया जाएगा।
Samudra Manthan Scheme में कितने कुओं की ड्रिलिंग होगी?
योजना के तहत 60 डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन वेल की ड्रिलिंग का प्रावधान है।
सरकार एक कुएं की ड्रिलिंग में कितनी मदद करेगी?
सरकार पात्र ड्रिलिंग लागत का 50 फीसदी तक या अधिकतम ₹675 करोड़ प्रति कुआं, जो भी कम हो, सहायता देगी।
Samudra Manthan Scheme से भारत को क्या फायदा होगा?
सरकार का लक्ष्य घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ाना, हाइड्रोकार्बन संसाधनों का विस्तार करना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है। योजना सफल रहने पर आयात बिल में सालाना करीब ₹1 लाख करोड़ तक की संभावित कमी का अनुमान है।
भारत में किन क्षेत्रों में तेल-गैस की खोज बढ़ेगी?
कृष्णा-गोदावरी, कावेरी, महानदी और अंडमान जैसे डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों को महत्वपूर्ण माना गया है।
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