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मुखर्जी नगर में UPSC एस्पिरेंट्स की मुश्किलें, महंगा किराया और सुविधाओं की कमी

 UPSC Aspirants:

UPSC Aspirants: दिल्ली का मुखर्जी नगर देशभर के युवाओं के लिए UPSC और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बड़ा केंद्र है। हर साल अलग-अलग राज्यों और शहरों से हजारों युवा IAS, SSC और राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहां पहुंचते हैं। लेकिन सपनों के इस शहर की चमक के पीछे छात्रों के संघर्ष की एक दूसरी तस्वीर भी है। NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में छात्रों ने महंगे किराये, खराब भोजन, पानी की समस्या, भारी ब्रोकरेज, सिक्योरिटी मनी और मानसिक दबाव जैसी कई चुनौतियों के बारे में बताया। छात्रों का कहना है कि पढ़ाई के साथ-साथ यहां रहने का खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

UPSC Aspirants: मुखर्जी नगर में सपनों के साथ संघर्ष भी-

मुखर्जी नगर की गलियों में कोचिंग संस्थान, लाइब्रेरी, किताबों की दुकानें और चाय की टपरियां हर जगह दिखाई देती हैं। यहां आने वाला हर छात्र अपने साथ बेहतर भविष्य का सपना लेकर आता है। आगरा के रहने वाले राहुल जादौन इतिहास में गोल्ड मेडलिस्ट हैं और दो बार NET क्वालिफाई कर चुके हैं। इसके बावजूद IAS बनने का सपना पूरा नहीं होने तक उन्हें लगता है कि उनकी बाकी उपलब्धियां अधूरी हैं। राहुल की तरह देशभर के हजारों युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लेकिन इस दौरान उन्हें आर्थिक और मानसिक दबाव का भी सामना करना पड़ता है।

UPSC Aspirants: घर से दूर छात्रों की सबसे बड़ी चिंता खाना-

घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहने वाले छात्रों के लिए पढ़ाई के साथ भोजन और रहने की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती है। छात्रों ने PG और सड़क किनारे मिलने वाले खाने को लेकर कई शिकायतें कीं। कुछ छात्रों के मुताबिक भोजन में पर्याप्त पौष्टिकता नहीं होती। कई जगह नियमित रूप से हरी सब्जियां नहीं मिलतीं और अक्सर आलू की सब्जी परोसी जाती है। कुछ छात्रों ने पनीर की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए।

रोज के खाने पर करीब 300 रुपये खर्च-

अलीगढ़ के रहने वाले विवेक पचौरी पिछले कुछ वर्षों से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि किराया और अन्य खर्चों को अलग कर दें, तब भी नाश्ते और दो वक्त के भोजन पर करीब 300 रुपये प्रतिदिन खर्च हो जाते हैं। उनके मुताबिक रोजमर्रा के खर्चों को देखते हुए कैफे या कॉफी शॉप में बैठना भी कई बार विलासिता जैसा लगता है।

साफ पानी के लिए भी देने पड़ते हैं पैसे-

मुखर्जी नगर में कई छात्रों ने पीने के पानी की समस्या भी बताई। छात्रों के अनुसार 20 लीटर पानी की बोतल के लिए 50 से 90 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। अलीगढ़ के सौरभ शर्मा का कहना है कि कुछ इलाकों में ग्राउंडवॉटर की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। उनके मुताबिक कुछ जगहों पर पानी का रंग भी बदल जाता है और छात्रों ने त्वचा संबंधी समस्याओं की शिकायत की है।

बीमार पड़ना भी पड़ता है महंगा-

छात्रों का कहना है कि मुखर्जी नगर में बीमार पड़ने पर स्वास्थ्य के साथ जेब पर भी असर पड़ता है। सौरभ शर्मा के अनुसार सामान्य डॉक्टर से परामर्श लेने में ही 1000 से 1500 रुपये तक खर्च हो सकते हैं। ऐसे में कई छात्र डॉक्टर के पास जाने के बजाय मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खुद इलाज करने की कोशिश करते हैं।

कमरों की भारी मांग, किराये का बढ़ता बोझ-

मुखर्जी नगर में कमरों की मांग काफी अधिक है। छात्रों का आरोप है कि इस मांग का फायदा उठाकर कई जगह छोटे कमरों को भी महंगे किराये पर दिया जाता है। वाराणसी के धर्मेंद्र, जो LLB कर चुके हैं, के मुताबिक कुछ जगह स्टोर रूम को रहने योग्य बनाकर किराये पर दिया जाता है। वहीं कुछ इमारतों की छतों पर छोटे-छोटे कमरे बनाकर 5 से 6 हजार रुपये तक किराया लिया जाता है। छात्रों का कहना है कि कई कमरों में पर्याप्त रोशनी और वेंटिलेशन तक नहीं होता। कुछ जगह फायर एग्जिट जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठते हैं।

 एक ही कमरे का अलग-अलग किराया-

मुखर्जी नगर की PG व्यवस्था को लेकर भी छात्रों ने कई सवाल उठाए हैं। हरियाणा के झज्जर की रहने वाली इनू बोरा के मुताबिक कई बार एक ही कमरे में रहने वाली छात्राओं से अलग-अलग किराया लिया जाता है। उनके अनुसार किसी छात्रा से 8 हजार, दूसरी से 7 हजार और तीसरी से 7500 रुपये तक लिए जाते हैं, जबकि सुविधाएं लगभग समान होती हैं।

सिक्योरिटी मनी को लेकर भी शिकायत-

छात्रों की प्रमुख शिकायतों में सिक्योरिटी मनी भी शामिल है। कमरे में रहने के दौरान एक महीने या उससे अधिक किराये के बराबर सिक्योरिटी जमा कराई जाती है। पलक नाम की छात्रा के मुताबिक कमरा छोड़ते समय कई बार सफाई, मरम्मत या अन्य कारण बताकर सिक्योरिटी से रकम काट ली जाती है। उनका कहना है कि सीमित पैसों में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए 6-7 हजार रुपये भी बड़ी रकम होती है।

मुखर्जी नगर की अपनी ‘दलाल स्ट्रीट’-

मुखर्जी नगर में कमरे और PG की तलाश के बीच ब्रोकरेज भी छात्रों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। UPSC एस्पिरेंट आनंद रतन सिंह के मुताबिक इलाके में ब्रोकरेज का एक नेटवर्क काम करता है। उनका कहना है कि कई बार छात्र खुद कमरा खोजकर मकान मालिक तक पहुंच जाए, तब भी किसी न किसी रूप में ब्रोकरेज देने की बात सामने आती है। आनंद के अनुसार एक कमरा लेने के लिए छात्र को पहले महीने में किराया, सिक्योरिटी, एडवांस और ब्रोकरेज मिलाकर 20 से 25 हजार रुपये तक का इंतजाम करना पड़ सकता है।

बिजली का अलग हिसाब-

PG में बिजली के शुल्क को लेकर भी छात्रों ने शिकायत की है। उनके अनुसार कई जगह 9 रुपये प्रति यूनिट, कहीं 10 रुपये और कहीं 12 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली का शुल्क लिया जाता है। छात्रों का कहना है कि किराये और अन्य खर्चों के साथ बिजली का यह अतिरिक्त बोझ भी उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ाता है।

लाइब्रेरी भी नहीं सस्ती-

मुखर्जी नगर में लाइब्रेरी छात्रों की पढ़ाई का अहम हिस्सा हैं। हजारों अभ्यर्थी रोजाना घंटों लाइब्रेरी में पढ़ाई करते हैं। इनू बोरा के मुताबिक SSC की तैयारी के दौरान उन्हें अब तक तीन से चार लाइब्रेरी बदलनी पड़ी हैं। उन्होंने कुछ जगहों पर शौचालयों की साफ-सफाई को लेकर भी असंतोष जताया। वहीं लाइब्रेरी की फीस करीब 2100 से 3000 रुपये प्रति माह तक बताई गई है।

देर रात लौटने वाले छात्रों की परेशानी-

कई छात्र देर रात तक लाइब्रेरी में पढ़ाई करते हैं। मुजफ्फरनगर के रहने वाले अर्जुन के मुताबिक कुछ PG में एक निश्चित समय के बाद गेट बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में देर रात लाइब्रेरी से लौटने वाले छात्रों को परेशानी होती है। हालांकि कई छात्रों ने कहा कि कुल मिलाकर वे इलाके में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।

सबसे बड़ा दबाव उम्मीदों का-

मुखर्जी नगर में छात्रों की मुश्किलें सिर्फ आर्थिक नहीं हैं। मानसिक दबाव भी उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा है। राहुल जादौन बताते हैं कि परीक्षा का तनाव कई बार समाज और रिश्तेदारों के सवालों से कम लगता है। वर्षों तक एक परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों पर परिवार की उम्मीदों का भी दबाव रहता है।

पेपर लीक की खबरें भी तोड़ती हैं हौसला-

UPSC को लेकर छात्रों ने कोई विशेष शिकायत नहीं की, लेकिन SSC और कुछ राज्य स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों ने पेपर लीक की खबरों पर चिंता जताई। एक छात्र ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कभी-कभी सब छोड़कर घर जाने का मन करता है, लेकिन माता-पिता की उम्मीदें याद आने पर वह दोबारा पढ़ाई शुरू कर देता है।

कानून-व्यवस्था और वेरिफिकेशन पर छात्रों की राय-

PG में वेरिफिकेशन और सुरक्षा को लेकर अधिकांश छात्रों का अनुभव सकारात्मक रहा। कई छात्रों ने कहा कि वे देर रात भी बाहर आ-जा सकते हैं और इलाके में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। हालांकि पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को लेकर कुछ छात्रों में भ्रम देखने को मिला। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी देवेश चंद्र श्रीवास्तव के अनुसार PG संचालक और मकान मालिक किरायेदारों के दस्तावेज अपने रिकॉर्ड में रखते हैं और इसी आधार पर जरूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी की जाती है।

सांसद मनोज तिवारी ने क्या कहा-

छात्रों की समस्याओं पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि उन्हें ऐसे मुद्दों की जानकारी लगातार मिलती रहती है। संबंधित विभागों के माध्यम से समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि पार्षद, विधायक और सांसद अपने-अपने स्तर पर काम कर रहे हैं और सांसद स्तर के मामलों पर वह लगातार निगरानी रखते हैं।

PG संचालकों ने क्या कहा-

छात्रों की शिकायतों पर NDTV ने PG संचालकों और मकान मालिकों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की। अधिकांश लोगों ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, सोनीपत के रहने वाले एक PG संचालक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि कई बार संपत्ति मालिक उनसे लीज के तौर पर काफी अधिक रकम वसूलते हैं। इससे PG चलाने की लागत बढ़ जाती है।

छात्रों की मांग: सिर्फ बुनियादी सुविधाएं-

मुखर्जी नगर के छात्र मुफ्त कमरा, मुफ्त भोजन या किसी विशेष सब्सिडी की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग साफ पानी, पौष्टिक भोजन, सुरक्षित और हवादार कमरे, पारदर्शी किराया व्यवस्था और सिक्योरिटी मनी की वापसी के स्पष्ट नियमों को लेकर है। हर सुबह हजारों युवा नई उम्मीद के साथ किताबें खोलते हैं। किसी के पिता किसान हैं तो किसी की मां गृहिणी। कोई परिवार की जमीन बेचकर यहां पहुंचा है तो कोई कर्ज लेकर। कमरे छोटे हैं, संघर्ष बड़े हैं और मंजिल अभी दूर है। फिर भी इन छात्रों का सपना सिर्फ अपनी जिंदगी बदलना नहीं, बल्कि देश की व्यवस्था का हिस्सा बनना है। उनकी मांग भी बहुत बड़ी नहीं है,वे चाहते हैं कि उन्हें उनके हिस्से की बुनियादी सुविधाएं मिलें

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