Home » अंतरराष्ट्रीय » भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, क्या सस्ते होंगे अमेरिकी सामान? मार्को रुबियो के दौरे पर नजर

भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, क्या सस्ते होंगे अमेरिकी सामान? मार्को रुबियो के दौरे पर नजर

India-US Trade Deal:

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। समझौते के पहले चरण को जल्द अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। इसके तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया है। वहीं, भारत भी अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क कम करने या खत्म करने पर विचार कर रहा है। ऐसे में सवाल है कि क्या इस समझौते के बाद भारत में अमेरिकी सामान सस्ते हो जाएंगे? इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे पर भी नजरें टिकी हैं।

India-US Trade Deal: डेयरी प्रोडक्ट्स पर अटका भारत-अमेरिका ट्रेड डील का मामला-

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है। अमेरिका चाहता है कि भारत उसके औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करे, ताकि अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में अधिक अवसर मिल सकें। इसके बदले अमेरिका भारतीय सामानों पर कम शुल्क लगाएगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश देने का मुद्दा अब भी समझौते की प्रमुख चुनौतियों में शामिल है।

India-US Trade Deal: भारतीय सामानों पर अमेरिका ने घटाया टैरिफ-

फरवरी 2026 में घोषित फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया था। इसके अलावा, रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया अतिरिक्त 25% शुल्क भी हटाने पर सहमति बनी। दूसरी ओर, भारत अमेरिकी औद्योगिक सामानों और कई कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने या खत्म करने के लिए तैयार हुआ। इन उत्पादों में मेवे, फल और सोयाबीन तेल के अलावा वाइन और शराब जैसे उत्पाद शामिल हैं। हालांकि, टैरिफ में कटौती का मतलब यह नहीं है कि सभी अमेरिकी सामान तुरंत सस्ते हो जाएंगे। उनकी कीमतों पर आयात शुल्क के साथ-साथ परिवहन लागत, अन्य करों और कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति का भी असर पड़ेगा।

पीयूष गोयल ने ट्रेड डील पर क्या कहा-

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील का पहला चरण फाइनल हो चुका है और फिलहाल इसकी कानूनी ड्राफ्टिंग चल रही है। हालांकि, समझौते को लागू करने का फैसला भारत के प्रतिस्पर्धी हितों को लेकर स्पष्टता मिलने के बाद किया जाएगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति के संकेत दे चुके हैं। हालांकि, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने 2 अक्टूबर को कहा था कि समझौते के जल्द पूरा होने की उम्मीद नहीं है।

निर्मला सीतारमण को जल्द समझौता पूरा होने की उम्मीद-

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को उम्मीद जताई कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील जल्द पूरी हो सकती है। इस समझौते से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलने के साथ वैश्विक व्यापार को भी फायदा पहुंच सकता है। समझौते के तहत टैरिफ में संभावित बदलाव से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं। वहीं, अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में पहुंच बढ़ने की संभावना है।

भारत का निर्यात 23% बढ़ा, ट्रेड डेफिसिट में कमी-

न्यूयॉर्क स्थित भारतीय कॉन्सुलेट जनरल के मुताबिक, सितंबर 2026 में भारत का वस्तु निर्यात 23% बढ़कर 44.4 अरब डॉलर पहुंच गया। इस दौरान व्यापार घाटे यानी ट्रेड डेफिसिट में भी कमी दर्ज की गई। भारत अमेरिका से कमर्शियल विमान, कोकिंग कोल, सोना, ऊर्जा और रक्षा से जुड़े उत्पादों की खरीद बढ़ाकर दोनों देशों के बीच व्यापार के अंतर को कम करने की कोशिश कर सकता है।

तेल और गैस की खरीद भी अहम मुद्दा-

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में ऊर्जा क्षेत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। भारत की रिफाइनरियां मुख्य रूप से मीडियम सावर क्रूड ऑयल के अनुरूप तैयार की गई हैं, जिसकी आपूर्ति खाड़ी देशों और रूस से होती है। अमेरिकी कच्चे तेल को दूसरे ग्रेड के तेल के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसकी भी सीमाएं हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के बीच रूस से मिलने वाले तेल का विकल्प तुरंत तलाशना भारत के लिए आसान नहीं है।

दूसरी ओर, भारत ने अमेरिकी गैस की खरीद बढ़ाई है। Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से मई 2026 की तिमाही में पहली बार अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर बना। अगस्त में भारत के एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी आधे से अधिक थी, लेकिन सितंबर में खाड़ी देशों से आपूर्ति बढ़ने के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) उससे आगे निकल गया।

20 अक्टूबर को मार्को रुबियो और एस. जयशंकर की मुलाकात-

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक समरकंद, मुंबई और जामनगर के दौरे पर हैं। मुंबई में 20 अक्टूबर को उनकी मुलाकात विदेश मंत्री एस. जयशंकर से होगी। इस बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतें भी वहां की सरकार के लिए चिंता का विषय हैं। ऐसे में ऊर्जा और व्यापार से जुड़े मुद्दे दोनों देशों की बातचीत में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

क्या भारत में सस्ते होंगे अमेरिकी सामान-

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के पहले चरण को अंतिम रूप मिलने के बाद कुछ अमेरिकी उत्पादों पर आयात शुल्क कम हो सकता है। इससे उनकी कीमतों में कमी आने की संभावना बन सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि किन उत्पादों पर कितना शुल्क घटाया जाता है और अन्य लागतों में क्या बदलाव आता है। फिलहाल डेयरी उत्पादों से जुड़ी चुनौतियों और समझौते की कानूनी प्रक्रिया के बीच अंतिम फैसले का इंतजार है। ऐसे में मार्को रुबियो और एस. जयशंकर की 20 अक्टूबर को होने वाली बैठक को इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह भी पढ़े- यूपी चुनाव 2027: 403 सीटें, हर चेहरे का हिसाब, चुनाव से पहले BJP क्यों खंगाल रही विधायकों का रिपोर्ट कार्ड?