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यूपी चुनाव से पहले ओवैसी की बढ़ी सक्रियता, पश्चिमी यूपी की 36 सीटों पर नजर; अखिलेश के लिए क्यों बढ़ सकती है चुनौती?

UP Elections:

UP Elections: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के साथ अब असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। ओवैसी की नजर खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या AIMIM की सक्रियता से अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं? आइए जानते हैं पूरा मामला।

UP Elections: पश्चिमी यूपी के 6 जिलों की 36 सीटों पर AIMIM की नजर-

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी का फोकस सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों पर है। इन छह जिलों की करीब 36 विधानसभा सीटों को AIMIM के लिए अहम माना जा रहा है। इनमें कई ऐसी सीटें भी हैं, जहां समाजवादी पार्टी के मुस्लिम विधायक हैं। ऐसे में अगर AIMIM इन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारती है, तो सपा के सामने मुस्लिम वोटों को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है।

UP Elections: क्या INDIA गठबंधन में शामिल होना चाहते हैं ओवैसी-

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिमी यूपी में AIMIM की बढ़ती सक्रियता को दबाव की राजनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी INDIA गठबंधन में अपनी जगह बनाने के लिए विपक्षी दलों पर दबाव डाल सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि ओवैसी मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ का इस्तेमाल गठबंधन में शामिल होने की संभावनाएं मजबूत करने के लिए कर सकते हैं। हालांकि, गठबंधन को लेकर AIMIM की रणनीति और भविष्य की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

सपा और कांग्रेस AIMIM को क्यों मानती हैं चुनौती-

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों की चिंता यह है कि AIMIM की मौजूदगी से बीजेपी विरोधी वोटों का बंटवारा हो सकता है। खासकर उन सीटों पर इसका असर पड़ सकता है, जहां मुकाबला पहले से ही बेहद करीबी रहता है। सपा के एक नेता ने AIMIM को बीजेपी की ‘बी-टीम’ बताते हुए कहा कि मुस्लिम मतदाता इस राजनीति को समझते हैं। हालांकि, यह सपा नेता का राजनीतिक आरोप है, न कि कोई स्थापित तथ्य। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिमी यूपी की कुछ सीटों पर अगर 2 से 5 प्रतिशत वोट भी किसी एक तरफ चले जाते हैं, तो चुनावी नतीजों पर असर पड़ सकता है। वहीं, AIMIM की मौजूदगी से बीजेपी को विपक्षी वोटों के बंटवारे का मुद्दा उठाने का मौका भी मिल सकता है।

2022 के विधानसभा चुनाव में क्या हुआ था-

उत्तर प्रदेश के 2022 विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर AIMIM को मिले वोट जीत के अंतर से अधिक थे। इसी आधार पर राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पार्टी की मौजूदगी ने कई सीटों पर मुकाबले को प्रभावित करने की संभावना पैदा की थी। हालांकि, केवल AIMIM को मिले वोटों और जीत के अंतर की तुलना से यह साबित नहीं होता कि पार्टी ने किसी खास उम्मीदवार को हराया या जिताया। इसके लिए मतदाताओं के वास्तविक मतदान व्यवहार और अन्य चुनावी परिस्थितियों को भी समझना जरूरी है।

पश्चिमी यूपी की सीटों पर AIMIM के वोट-

– नकुड़ (सहारनपुर): AIMIM को 3,593 वोट मिले, जबकि जीत का अंतर 315 वोट था।
– फॉक्सी: AIMIM को 2,290 वोट मिले और जीत का अंतर 1,445 वोट रहा।
– तितावी नगर: AIMIM को 2,261 वोट मिले, जबकि जीत का अंतर 782 वोट था।

पूर्वांचल की सीटों पर भी दिखा था असर-

– सुल्तानपुर: AIMIM को 5,251 वोट मिले, जबकि जीत का अंतर 1,009 वोट रहा।
– औराई: AIMIM को 2,190 वोट मिले और जीत का अंतर 1,647 वोट था।
– शाहगंज: AIMIM को 8,128 वोट मिले, जबकि जीत का अंतर महज 719 वोट रहा।

इन आंकड़ों के आधार पर AIMIM को मिले वोट और जीत के अंतर के बीच अंतर साफ दिखाई देता है। हालांकि, इन सीटों पर चुनावी नतीजों को केवल AIMIM के प्रदर्शन से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।

यूपी चुनाव में क्या अखिलेश यादव की बढ़ेंगी मुश्किलें-

अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में AIMIM की रणनीति पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी। पश्चिमी यूपी की मुस्लिम बहुल सीटों पर पार्टी की सक्रियता समाजवादी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है, खासकर तब जब दोनों दलों के उम्मीदवार एक ही सीट पर चुनाव लड़ते हैं। हालांकि, चुनावी मुकाबले की तस्वीर उम्मीदवारों के चयन, गठबंधन, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुझान पर निर्भर करेगी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि ओवैसी की पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ती है और उसका प्रदर्शन सपा, बीजेपी तथा अन्य दलों के समीकरणों को किस तरह प्रभावित करता है।

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