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यूपी से तमिलनाडु तक… आखिर किस जाति का CM पर दबदबा? पूरा गणित चौंका देगा!

Indian Politics: भारतीय राजनीति में सत्ता का सामाजिक आधार हमेशा चर्चा का विषय रहा है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि देश के विभिन्न राज्यों में मुख्यमंत्री पद पर अलग-अलग सामाजिक वर्गों का वर्चस्व रहा है। यह तस्वीर बताती है कि भारत का राजनीतिक ढांचा एकरूप नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सामाजिक समीकरणों से गहराई से प्रभावित है।

सामान्य वर्ग का वर्चस्व कायम

आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री पद पर सामान्य वर्ग (GEN) का दबदबा सबसे ज्यादा रहा है, जहां लगभग 99.7 प्रतिशत कार्यकाल इसी वर्ग के नेताओं के पास रहा। इसी तरह आंध्र प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा और पंजाब में भी सामान्य वर्ग का वर्चस्व 90 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि इन राज्यों में लंबे समय तक सत्ता सीमित सामाजिक दायरे में केंद्रित रही।

Indian Politics: राजस्थान-महाराष्ट्र में उभरता संतुलन

वहीं राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सामाजिक संतुलन अपेक्षाकृत बेहतर नजर आता है। यहां सामान्य वर्ग का दबदबा तो है, लेकिन अन्य वर्गों, खासकर ओबीसी (OBC), की भागीदारी भी धीरे-धीरे बढ़ी है। इसी तरह मध्य प्रदेश और गुजरात में भी ओबीसी वर्ग की हिस्सेदारी में वृद्धि देखने को मिली है, जो बदलते सामाजिक समीकरणों की ओर इशारा करती है।

उत्तर भारत का जटिल सामाजिक गणित

राजनीतिक दृष्टि से अहम उत्तर प्रदेश में सत्ता का स्वरूप अधिक जटिल है। यहां सामान्य वर्ग के साथ-साथ ओबीसी और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही है। वहीं छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही है, जो राज्य के सामाजिक ढांचे को दर्शाती है।

Indian Politics: दक्षिण और पूर्व में OBC नेतृत्व मजबूत

दक्षिण और पूर्वी भारत के कुछ राज्यों में तस्वीर पूरी तरह अलग है। तमिलनाडु, बिहार और कर्नाटक में ओबीसी वर्ग का नेतृत्व अधिक मजबूत होकर उभरा है। यह सामाजिक न्याय की राजनीति के प्रभाव को दर्शाता है।

झारखंड में ST का दबदबा

वहीं झारखंड में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग का दबदबा सबसे ज्यादा है, जहां मुख्यमंत्री पद पर उनका कार्यकाल लगभग 79 प्रतिशत रहा है। यह राज्य की आदिवासी बहुल आबादी और उसके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में सत्ता का वितरण सामाजिक संरचना के अनुरूप बदलता रहा है। अलग-अलग राज्यों में सामाजिक प्रतिनिधित्व की यह विविधता भारतीय लोकतंत्र की जटिलता और उसकी गतिशीलता को दर्शाती है।

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