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IPS केके बिश्नोई की शादी से चर्चा में आई रस्म, जानें बारात से पहले दूल्हे को क्यों दूध पिलाती है मां?

IPS केके बिश्नोई की शादी

IPS KK Bishnoi: IPS अधिकारी कृष्ण कुमार बिश्नोई और बरेली की ASP अंशिका वर्मा की शादी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। शादी की रस्मों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें एक खास परंपरा ने लोगों का ध्यान खींचा है। वायरल वीडियो में दूल्हे बने IPS अधिकारी अपनी मां के पास बैठकर ‘स्तनपान’ की प्रतीकात्मक रस्म निभाते नजर आ रहे हैं। इस रस्म को राजस्थान और खासतौर पर बिश्नोई समाज में ‘आंचल पीना’ कहा जाता है, जो सदियों पुरानी परंपरा मानी जाती है।

क्या है ‘आंचल पीना’ की रस्म?

यह रस्म शादी के समय तब निभाई जाती है जब दूल्हा पूरी तरह से तैयार हो जाता है और बारात के लिए निकलने वाला होता है। इस दौरान वह अपनी मां के पास जाता है, जहां मां उसे प्रतीकात्मक रूप से दूध पिलाती है। कई जगहों पर यह दूध थाली में रखकर दिया जाता है। रस्म के दौरान मां अपने बेटे को आशीर्वाद देती है और उसके सिर पर हाथ रखकर उसे नए जीवन की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करती है। यह परंपरा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि मां और बेटे के बीच गहरे भावनात्मक संबंध को दर्शाती है।

IPS KK Bishnoi: परंपरा का सांस्कृतिक महत्व

समाज के जानकारों के अनुसार, ‘आंचल पीना’ रस्म का अर्थ यह है कि बेटा जब विवाह के नए पड़ाव पर पहुंचता है, तो वह मां के दूध के ऋण को स्वीकार करता है। यह प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है कि बेटा जीवनभर मां के संस्कारों और स्नेह को याद रखेगा। यहीं नहीं यह परंपरा यह भी संदेश देती है कि बेटा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए, वह मां के प्यार और त्याग का कर्ज कभी नहीं चुका सकता। यही कारण है कि यह रस्म मां-बेटे के रिश्ते को और मजबूत बनाती है। बिश्नोई समाज अपनी अनोखी परंपराओं और प्रकृति प्रेम के लिए जाना जाता है। इस समाज में ममता और करुणा को सबसे ऊंचा स्थान दिया जाता है। यही वजह है कि यहां महिलाएं अपने बच्चों के साथ-साथ अनाथ हिरणों तक को स्तनपान कराने के लिए जानी जाती हैं। इस अनोखी परंपरा ने न केवल भारत बल्कि दुनिया भर में बिश्नोई समाज को अलग पहचान दिलाई है।

फिलहाल, शादी की इस रस्म का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे भावुक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बता रहे हैं, तो कुछ इसे अनोखी परंपरा के रूप में देख रहे हैं।

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