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ईरान पर दबाव बढ़ाएगा अमेरिका, पहले से बड़ा नौसैनिक बेड़ा रवाना- ट्रंप बोले: सभी विकल्प खुले

iran us tension: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन ईरान की दिशा में पहले से कहीं अधिक बड़ा नौसैनिक बेड़ा तैनात करने जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, लेकिन अगर समझौता नहीं होता है तो अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।

पहले की तैनाती से भी बड़ा बेड़ा

राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, यह नौसैनिक तैनाती उस बेड़े से भी बड़ी होगी, जो पहले वेनेजुएला के समीप तैनात की गई थी। उन्होंने इसे एक “बड़ा जहाज़ी बेड़ा” बताया और कहा कि इसका उद्देश्य ईरान पर दबाव बढ़ाना है, ताकि बातचीत के रास्ते खुले रहें।

iran us tension: बातचीत की उम्मीद, लेकिन विकल्प खुले

ट्रंप ने कहा, “हम अब ईरान की ओर ज्यादा संख्या में जहाज भेज रहे हैं। उम्मीद है कि समझौता हो जाएगा।” जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान को कोई समय-सीमा दी गई है, तो उन्होंने सीधे जवाब देने से इनकार करते हुए कहा कि इसकी जानकारी केवल ईरान को ही है।

ईरान से सीधे संपर्क की पुष्टि

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी स्वीकार किया कि उनका ईरान से सीधा संपर्क हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का संदेश ईरान के नेतृत्व तक पहुंच चुका है।
ट्रंप बोले, “हां, संदेश पहुंचा है।”

iran us tension: सैन्य ताकत का प्रदर्शन, लेकिन विवरण नहीं

ट्रंप ने अमेरिका की सैन्य क्षमता पर जोर देते हुए कहा कि उसके पास दुनिया के सबसे शक्तिशाली युद्धपोत हैं। हालांकि, उन्होंने किसी संभावित सैन्य कार्रवाई के समय और स्वरूप पर कुछ भी बताने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सैन्य योजनाओं पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करना उचित नहीं है।

ओवल ऑफिस में दिए बयान

ये टिप्पणियां व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आईं, जहां राष्ट्रपति ने घरेलू कार्यक्रमों के बीच विदेश नीति, रक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़े सवालों के जवाब दिए।

iran us tension: अमेरिका-ईरान रिश्तों में लंबे समय से तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच संबंध वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं। प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकल सका। तनाव के समय अमेरिका द्वारा नौसैनिक तैनाती को अक्सर दबाव और चेतावनी के संकेत के तौर पर देखा जाता रहा है, हालांकि वॉशिंगटन कूटनीतिक समाधान की बात भी करता रहा है।

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