J/k news: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कश्मीरी पंडित समुदाय से अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने और जम्मू-कश्मीर के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अब वह समय आ गया है जब कश्मीरी पंडित अपनी मातृभूमि में सम्मानजनक स्थान फिर से हासिल करें और प्रदेश के विकास में योगदान दें। श्रीनगर के एसकेआईसीसी (SKICC) में आयोजित दो दिवसीय ‘ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव: फ्रॉम एक्साइल टू एक्सीलेंस’ के उद्घाटन समारोह में संबोधित करते हुए एलजी मनोज सिन्हा ने समुदाय की संघर्षपूर्ण यात्रा को साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया।
36 साल बाद मातृभूमि में जुटे कश्मीरी पंडित
यह सम्मेलन उन कश्मीरी पंडितों का बड़ा जमावड़ा है, जो लगभग 36 वर्षों बाद अपनी जन्मभूमि कश्मीर लौटे हैं। इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीर कभी उनके विस्थापन का दर्द देख चुका है और आज उनके आत्मविश्वास भरे पुनरुत्थान का गवाह बन रहा है। उन्होंने कहा, “आज मेरे सामने इस मिट्टी के बेटे-बेटियां बैठे हैं। हम सभी एक ऐतिहासिक पल के साक्षी हैं।”
J/k news: दर्द को ताकत में बदलने की मिसाल
एलजी ने कहा कि विस्थापन के बाद समुदाय के सामने हार मानने या फिर खुद को दोबारा खड़ा करने के दो रास्ते थे। कश्मीरी पंडितों ने संघर्ष और पुनर्निर्माण का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि समुदाय ने अपने दर्द को ताकत और संघर्ष को उद्देश्य में बदल दिया। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने अपनी पहचान, संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखा।
J/k news: बदले हुए जम्मू-कश्मीर में लौट रहा भरोसा
मनोज सिन्हा ने कहा कि आज जो लोग कभी विस्थापन का शिकार हुए थे, वे नए आत्मविश्वास के साथ अपनी मातृभूमि लौट रहे हैं। यह सिर्फ उनकी वापसी नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर के बेहतर सुरक्षा माहौल और बदलते भविष्य में बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पुराने रिश्तों को फिर से मजबूत किया जाए और साझा विरासत से दोबारा जुड़ा जाए।
जम्मू-कश्मीर के भविष्य में होगी अहम भूमिका
एलजी ने कहा कि कभी लोगों को लगता था कि विस्थापित समुदाय फिर कभी खड़ा नहीं हो पाएगा, लेकिन कश्मीरी पंडितों ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से इस धारणा को गलत साबित कर दिया। उन्होंने कहा कि नया जम्मू-कश्मीर उभर रहा है और इसके भविष्य को आकार देने में कश्मीरी पंडित समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में रहते हों, उनकी सफलता उनकी जड़ों और विरासत से जुड़ी हुई है।
युवाओं को प्रेरित करेंगी संघर्ष की कहानियां
मनोज सिन्हा ने इस सम्मेलन को पीढ़ियों को जोड़ने वाला मंच बताया। उन्होंने कहा कि समुदाय की यादें, बलिदान और उम्मीदें आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। साथ ही उन्होंने समाज से विस्थापन की त्रासदी के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने, न्याय, सम्मान और स्थायी मेल-मिलाप की दिशा में काम करने की अपील की।
जम्मू-कश्मीर में संस्थान स्थापित करने का आह्वान
J/k news: उपराज्यपाल ने कश्मीरी पंडित समुदाय से जम्मू-कश्मीर में शैक्षणिक और सामाजिक संस्थान स्थापित करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि समुदाय का अनुभव, ज्ञान और वैश्विक पहचान प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि आप संस्थान बनाएं, प्रतिभाओं को आगे बढ़ाएं और जम्मू-कश्मीर के विकास में अपना योगदान दें। आपका अनुभव इस धरती के भविष्य के लिए बेहद मूल्यवान है।”
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