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Kanwar Yatra 2026: योगी राज में आस्था की अनोखी तस्वीर! 24 पोते बने ‘श्रवण कुमार’, दादी ने योगी सरकार की जमकर की तारीफ

Kanwar Yatra 2026: योगी राज में आस्था की अनोखी तस्वीर! 24 पोते बने 'श्रवण कुमार', दादी ने योगी सरकार की जमकर की तारीफ

Kanwar Yatra 2026: सावन की पावन कांवड़ यात्रा इस बार केवल शिवभक्ति और आस्था का ही नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों के संस्कारों और बुजुर्गों के सम्मान का भी सशक्त संदेश दे रही है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा के लिए किए गए व्यापक और सुव्यवस्थित इंतजामों के बीच बुलंदशहर के एक परिवार ने ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। 95 वर्षीय सोनदेवी की वर्षों पुरानी हरिद्वार जाकर मां गंगा में स्नान करने की इच्छा को उनके 24 पोतों ने अपना संकल्प बनाया और उन्हें पालकी में बैठाकर हरिद्वार से अपने गांव तक कंधों पर लेकर चल पड़े।

दादी की अधूरी इच्छा को पोतों ने बनाया अपना धर्म

बुलंदशहर के हसनपुर जागीर गांव निवासी 95 वर्षीय सोनदेवी लंबे समय से हरिद्वार जाकर गंगास्नान करने की इच्छा रखती थीं। उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण उनके लिए इतनी लंबी यात्रा करना संभव नहीं था। ऐसे में परिवार के युवाओं ने ठान लिया कि दादी का यह सपना किसी भी कीमत पर पूरा किया जाएगा।’महाकाल ग्रुप’ के नाम से यात्रा कर रहे 24 पोते अपनी दादी को हरिद्वार लेकर पहुंचे, जहां उन्होंने श्रद्धापूर्वक मां गंगा में स्नान कराया। इसके बाद सभी पोते बारी-बारी से पालकी को अपने कंधों पर उठाकर दादी को गांव तक लेकर जा रहे हैं। इस भावुक दृश्य ने कांवड़ मार्ग पर हर किसी को भावविभोर कर दिया।

Kanwar Yatra 2026: योगी सरकार की व्यवस्थाओं की पोतों ने की खुलकर सराहना

सोनदेवी के पोतों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा के लिए किए गए सुरक्षा और सुविधा संबंधी इंतजाम बेहद सराहनीय हैं। पूरे कांवड़ मार्ग पर सुरक्षा, साफ-सफाई, चिकित्सा सुविधा, पेयजल और यातायात प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था होने से यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा। उन्होंने कहा कि सरकार की बेहतर व्यवस्थाओं की वजह से उनकी दादी की यात्रा भी सुरक्षित और आरामदायक तरीके से पूरी हो रही है।

Kanwar Yatra 2026: हर कुछ दूरी पर बदलते हैं कंधे, ताकि दादी को न हो कोई तकलीफ

24 पोतों की इस टोली ने सेवा का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसकी हर कोई प्रशंसा कर रहा है। यात्रा के दौरान कोई एक व्यक्ति लगातार पालकी नहीं उठाता। कुछ दूरी तय करने के बाद दूसरे पोते जिम्मेदारी संभाल लेते हैं, ताकि किसी पर अधिक भार न पड़े और दादी को भी पूरे सफर में किसी तरह की असुविधा महसूस न हो। परिवार का कहना है कि दादी के चेहरे की मुस्कान और उनका आशीर्वाद ही उनके लिए सबसे बड़ी पूंजी है।जैसे ही यह अनोखा कारवां मेरठ के सिवाया टोल प्लाजा पहुंचा, वहां मौजूद लोगों की भीड़ सोनदेवी को देखने के लिए उमड़ पड़ी। कई लोगों ने उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, जबकि अनेक श्रद्धालुओं ने इस प्रेरणादायक पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया। पालकी में बैठी सोनदेवी पूरे रास्ते हाथ जोड़कर ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष करती रहीं, जबकि उनके पोते पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ उनकी सेवा में जुटे रहे।

श्रवण कुमार की याद दिलाने वाली सेवा बनी प्रेरणा

आज के दौर में जहां भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच रिश्तों में दूरियां बढ़ने की बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं, वहीं बुलंदशहर के इन 24 पोतों ने अपनी 95 वर्षीय दादी की सेवा कर यह साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों का सम्मान आज भी सर्वोपरि है। उनकी यह सेवा लोगों को पौराणिक श्रवण कुमार की याद दिला रही है, जिन्होंने अपने माता-पिता की सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म माना था।यह यात्रा केवल कांवड़ और शिवभक्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने समाज को यह संदेश भी दिया कि माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा सबसे बड़ी पूजा है। योगी सरकार की बेहतर व्यवस्थाओं के बीच 24 पोतों द्वारा अपनी दादी की सेवा का यह दृश्य कांवड़ यात्रा की सबसे प्रेरणादायक तस्वीर बनकर सामने आया है, जिसे देखकर हर कोई भारतीय परिवार व्यवस्था, संस्कार और सेवा भावना की सराहना कर रहा है।

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