Kerala Elections 2026: केरल की 140 विधानसभा सीटों पर मतदान जल्द शुरू होने वाला है। इस चुनाव की व्यापकता और जटिलता इसे खास बनाती है। राज्य में कुल 883 उम्मीदवार मैदान में हैं, यानी प्रति सीट औसतन छह से सात प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने कई निर्वाचन क्षेत्रों को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है।

मतदाता और मतदान केंद्र
राज्य में लगभग 27 लाख मतदाता हैं, जो 30,000 से अधिक मतदान केंद्रों में फैले हैं। यह स्थिति राज्य में भारी मतदान की संभावना को दर्शाती है, क्योंकि केरल हमेशा राजनीतिक रूप से सक्रिय रहा है।
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने 2021 में सत्ता बरकरार रखकर राज्य में लंबे समय से चली आ रही सरकारों के बदल-बदल की परंपरा को तोड़ दिया था। लंबे समय तक सत्ता में रहने से दबाव बढ़ जाता है, लेकिन वर्तमान में कोई बड़ा असंतोष नहीं दिख रहा। छोटे-छोटे विरोध स्थानीय प्रतिनिधियों पर केंद्रित हैं।
Kerala Elections 2026: विपक्षी मोर्चों की चाल
यूडीएफ स्थानीय असंतोष का फायदा उठाकर धीरे-धीरे सत्ता परिवर्तन और अपने पारंपरिक समर्थन को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भाजपा का फोकस इस चुनाव में सरकार बनाने से ज्यादा अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बढ़ाने पर है।
कड़े मुकाबले में मामूली वोट अंतर भी कई सीटों पर निर्णायक साबित हो सकता है। केरल में आमतौर पर मतदान प्रतिशत 70 से 80 प्रतिशत के बीच रहता है, इसलिए थोड़ी भी बढ़ोतरी या कमी परिणाम बदल सकती है।

अल्पसंख्यक समुदायों का प्रभाव
तीनों मोर्चे जानते हैं कि उनका भविष्य मुस्लिम और ईसाई समुदायों के रुख पर निर्भर करेगा, जो कुल मतदाताओं का लगभग 42 प्रतिशत हैं। यह 2024 के लोकसभा चुनाव और हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में साफ दिखाई दिया।
सुरक्षा कड़ी है। 30,000 से अधिक बूथों में से लगभग 2,500 को संवेदनशील घोषित किया गया है। केंद्रीय बल और तमिलनाडु पुलिस की इकाइयाँ पूरे राज्य में तैनात हैं।








