Kerala New CM: कांग्रेस ने गुरुवार को वी. डी. सतीशन को केरल का नया मुख्यमंत्री घोषित किया। लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय सतीशन कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और संगठन से लेकर विधानसभा तक मजबूत पकड़ रखते हैं। एक प्रखर वक्ता और रणनीतिकार वी. डी. सतीशन का जन्म 1964 में कोच्चि के नेत्तूर में हुआ था और उन्होंने छात्र राजनीति (NSUI) से अपने करियर की शुरुआत की थी. वह छह साल से परावुर के विधायक हैं.
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
1964 में कोच्चि के नेत्तूर में जन्मे वी. डी. सतीशन ने छात्र राजनीति से अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने National Students’ Union of India और केरल स्टूडेंट्स यूनियन में सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में यूथ कांग्रेस के जरिए उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत की।
Kerala New CM: छह बार के विधायक
सतीशन 2001 से लगातार परावुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने पहला चुनाव 1996 में लड़ा था, लेकिन तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। आज वह केरल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं।
पेशे से वकील, राजनीति में मजबूत पकड़
वी. डी. सतीशन पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण के करीबी समर्थक माने जाते रहे हैं. वह कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं और 2021 में केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर भी काम कर चुके हैं. वह केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं. इसके अलावा, वह पेशे से वकील हैं और केरल हाईकोर्ट में वकालत भी कर चुके हैं. कांग्रेस संगठन और जमीनी राजनीति दोनों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
Kerala New CM: विपक्ष के आक्रामक नेता की पहचान
2021 में यूडीएफ की हार के बाद उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया गया था। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की सरकार को भ्रष्टाचार, गोल्ड स्मगलिंग, कानून-व्यवस्था और आर्थिक मुद्दों पर लगातार घेरा।
‘100 सीटों’ वाला बड़ा दांव
2026 विधानसभा चुनाव में सतीशन ने बड़ा दावा किया था कि अगर यूडीएफ 100 सीटें नहीं जीतता तो वह राजनीति छोड़ देंगे। चुनाव में गठबंधन की बड़ी जीत के बाद यह दांव उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।
Kerala New CM: नई पीढ़ी के नेता के रूप में पहचान
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सतीशन को आगे बढ़ाना कांग्रेस की नई रणनीति का हिस्सा है, जिसमें अनुभवी लेकिन अपेक्षाकृत युवा चेहरों को नेतृत्व में लाया जा रहा है। उनकी पहचान एक आक्रामक वक्ता, रणनीतिकार और सुधारवादी नेता के रूप में बनी हुई है।
ये भी पढ़े… पटना समेत 6 जिलों में बड़ा सुरक्षा अभ्यास, सायरन बजते ही छा जाएगा अंधेरा, ब्लैकआउट मॉकड्रिल से मचेगी हलचल








