Bihar Blackout Drill: बिहार में गुरुवार शाम सात बजे पटना सहित छह जिलों में अचानक सायरन बजने के साथ ब्लैकआउट किया जाएगा। इस दौरान पूरे इलाके में कुछ समय के लिए अंधेरा छा जाएगा और सड़क पर चल रहे सभी वाहन जहां हैं, वहीं रोक दिए जाएंगे। यह अभ्यास गृह मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश पर किया जा रहा है। 14 मई को पटना के साथ-साथ किशनगंज, बेगूसराय, पूर्णिया, अररिया और कटिहार जिलों में हवाई हमले और ब्लैकआउट से जुड़ा मॉकड्रिल आयोजित होगा।
आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारी और समन्वय
इस पूरे मॉकड्रिल की जिम्मेदारी राज्य स्तर पर नागरिक सुरक्षा निदेशालय को दी गई है। सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई हैं। बुधवार को आपदा प्रबंधन विभाग में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए टेबल टॉप एक्सरसाइज भी की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल और नागरिक सुरक्षा निदेशालय के महानिदेशक डॉ. परेश सक्सेना ने की। इस बैठक में संबंधित जिलों के आपदा अधिकारियों ने भी भाग लिया और पूरी योजना पर चर्चा की गई।
ब्लैकआउट के दौरान जनता से अपील
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि शाम 7 बजे से 7:15 बजे तक होने वाले ब्लैकआउट के दौरान घबराएं नहीं और पूरी तरह सहयोग करें। इस दौरान लोगों से कहा गया है कि वे अपार्टमेंट में जनरेटर का इस्तेमाल न करें और मोबाइल स्क्रीन, टॉर्च या किसी भी अन्य रोशनी का प्रयोग न करें ताकि पूर्ण ब्लैकआउट का पालन हो सके।
पटना जिला प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि सायरन बजते ही अपने घर, दुकान और वाहनों की सभी लाइटें बंद कर दें। हालांकि इस दौरान जरूरी सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी, जिससे आपात स्थिति में किसी तरह की बाधा न आए।
Bihar Blackout Drill: अफवाहों से बचने की सलाह
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा कार्यक्रम नागरिक सुरक्षा यानी सिविल डिफेंस से जुड़ा अभ्यास है, जिसका उद्देश्य हवाई हमले जैसी आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी को मजबूत करना है। लोगों से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांतिपूर्ण तरीके से इस अभ्यास में सहयोग करें।
कंट्रोल रूम और सिमुलेशन साइट्स की व्यवस्था
मॉकड्रिल के दौरान एक कंट्रोल रूम लगातार सक्रिय रहेगा ताकि पूरी गतिविधि पर नजर रखी जा सके। पटना जिले में इसके लिए कुछ स्थानों को सिमुलेशन साइट के रूप में चुना गया है, जिनमें पटना समाहरणालय, बिस्कोमान भवन, बांकीपुर बस स्टैंड और आईजीआईएमएस शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर तय किए गए आपदा परिदृश्यों के अनुसार अभ्यास किया जाएगा और उसी के आधार पर पूरी कार्ययोजना लागू की जाएगी।
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