Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित इजराइली हमले की आशंका को देखते हुए उन्हें समारोह से दूर रहने की सलाह दी है। हालांकि, इस संबंध में ईरानी अधिकारियों की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
4 जुलाई से शुरू होगी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की औपचारिक प्रक्रिया 4 जुलाई से तेहरान में शुरू होगी। इसके बाद 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम संस्कार में भारत समेत करीब 30 देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
Khamenei Funeral: भारत की ओर से शामिल होगा प्रतिनिधिमंडल
भारत सरकार ने केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए नामित किया है। दोनों 3 जुलाई को ईरान रवाना होंगे।
Khamenei Funeral: ईरान ने देशवासियों से की शामिल होने की अपील
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने देशवासियों से बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार में शामिल होने की अपील की है। गालिबाफ ने कहा कि लोगों की मौजूदगी दुनिया को ईरान की एकजुटता और दृढ़ संकल्प का संदेश देगी। वहीं राष्ट्रपति पजशकियान ने इसे ईरान के लिए “एक नए अध्याय की शुरुआत” बताया।
तेहरान में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
अंतिम संस्कार को लेकर राजधानी तेहरान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। ग्रैंड मोसल्ला परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई है, प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रतिबंध लगाए गए हैं और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग की अपील की गई है।
अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी नजर
इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते (MoU) के कई अहम मुद्दों जैसे प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज्ड फंड, तेल निर्यात और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अब भी सहमति नहीं बन सकी है।
होर्मुज में सामान्य हो रही जहाजों की आवाजाही
समुद्री निगरानी कंपनी केप्लर के अनुसार, मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से 34 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई। हालिया तनाव के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर व्यापारिक गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं।
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