Krishna Vaman Dwadashi: हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल द्वादशी पर मनाई जाने वाली वामन द्वादशी के लगभग 15 दिन बाद, कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को कृष्ण वामन द्वादशी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा विशेष रूप से की जाती है।
भगवान वामन अवतार की कथा और मान्यता
भगवान वामन को भगवान नारायण का पाँचवाँ अवतार माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह कथा राजा बलि से जुड़ी हुई है, जिसमें भगवान विष्णु ने वामन रूप में आकर तीन पग भूमि का दान माँगा और असुर राजा बलि को पराजित कर दिया। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। द्वादशी तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है, इसलिए इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों को धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और तिथि का समय
कृष्ण वामन द्वादशी के दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 57 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा। कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि रविवार को पूरे दिन रहेगी और अगले दिन यानी 15 अप्रैल को देर रात 12 बजकर 12 मिनट तक प्रभावी रहेगी।
Krishna Vaman Dwadashi: नक्षत्र, योग और करण का विवरण
इस दिन शतभिषा नक्षत्र दोपहर 4 बजकर 6 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद पूर्व भाद्रपद नक्षत्र लगेगा। योग शुक्ल दोपहर 3 बजकर 40 मिनट तक रहेगा, जबकि करण कौलव दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।

14 अप्रैल के शुभ मुहूर्त
14 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 27 मिनट से 5 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक, विजय मुहूर्त 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 45 मिनट से 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। अमृत काल सुबह 8 बजकर 53 मिनट से 10 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा त्रिपुष्कर योग शाम 5 बजकर 6 मिनट से अगले दिन देर रात 12 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।
अशुभ समय (राहुकाल और अन्य समय)
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 3 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। यमगंड सुबह 9 बजकर 9 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक और गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। पूरे दिन पंचक का प्रभाव भी बना रहेगा।
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