Home » उत्तर प्रदेश » लखीमपुर खीरी में देह व्यापार का ‘जहरीला’ मकड़जाल! सिसकती इंसानियत के बीच उठे कई सुलगते सवाल?

लखीमपुर खीरी में देह व्यापार का ‘जहरीला’ मकड़जाल! सिसकती इंसानियत के बीच उठे कई सुलगते सवाल?

Lakhimpur Kheri

Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश का तराई क्षेत्र, जो अपनी प्राकृतिक संपदा और दुधवा नेशनल पार्क के लिए विश्व विख्यात है, आज एक ऐसी घिनौनी और काली सच्चाई की गिरफ्त में है जो समाज की जड़ों को खोखला कर रही है। भारत-नेपाल सीमा से सटे इस संवेदनशील जिले लखीमपुर खीरी में इन दिनों अवैध देह व्यापार (Human Trafficking & Flesh Trade) का काला कारोबार अपनी जड़ें काफी गहराई तक जमा चुका है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह धंधा किसी अंधेरी गली में नहीं, बल्कि खाकी की ‘नाक के नीचे’ और शहर के व्यस्तम इलाकों में फल-फूल रहा है।

देह व्यापार का नया ‘हॉटस्पॉट’

शहर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली महेवागंज पुलिस चौकी इन दिनों चर्चाओं के केंद्र में है। सूत्रों और स्थानीय निवासियों से मिली जानकारी के अनुसार, महेवागंज कस्बे के कई रिहायशी मकानों और संदिग्ध ठिकानों पर देह व्यापार का यह घिनौना खेल सरेआम खेला जा रहा है। स्थानीय पुलिस की गश्त और ‘सतर्कता’ के दावों के बीच, दलाल और संगठित गिरोह बिना किसी खौफ के अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। इस काले साम्राज्य को विस्तार देने के लिए गिरोह के सरगना बेहद शातिर तरीका अपना रहे हैं। जानकारी के मुताबिक आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा महिलाओं को ‘नौकरी’ या ‘मदद’ का झांसा देकर इस दलदल में उतारा जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि बाहरी क्षेत्रों और सीमावर्ती गांवों से कम उम्र की लड़कियों को बहला-फुसलाकर लाया जाता है और फिर उन्हें देह व्यापार के धंधे में झोंक दिया जाता है। यह धंधा अब केवल छिटपुट वारदातों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक संगठित माफिया का रूप ले चुका है, जिसमें दलाल, होटल संचालक और कुछ ‘सफेदपोश’ लोग पर्दे के पीछे से खेल रहे हैं।

Lakhimpur Kheri: शहर के अलग-अलग हिस्सों में फैला ‘कैंसर’

महेवागंज तो महज एक बानगी है; सूत्रों की मानें तो लखीमपुर शहर के कई मोहल्लों, पॉश कॉलोनियों और हाईवे के किनारे स्थित ढाबों व होटलों में चोरी-छिपे यह अवैध धंधा संचालित हो रहा है। रात ढलते ही इन ठिकानों पर ‘रंगीन रातों’ का बाजार सजने लगता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद पुलिस केवल ‘खानापूर्ति’ के लिए छापेमारी करती है, जिससे मुख्य सरगना हमेशा बच निकलते हैं।

खाकी की खामोशी पर उठते गंभीर सवाल

जब शहर के बीचों-बीच और चौकी के चंद कदमों की दूरी पर देह व्यापार जैसा घिनौना कृत्य हो रहा हो, तो पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है। क्या स्थानीय पुलिस को इन ठिकानों की जानकारी नहीं है? क्या ‘हफ्ता वसूली’ के चक्कर में जिम्मेदार अधिकारी अपनी आँखें मूंदकर बैठे हैं? आखिर क्यों अब तक किसी बड़े गिरोह का भंडाफोड़ नहीं किया गया?

आपको बता दें कि लखीमपुर खीरी जिला नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में देह व्यापार का बढ़ता ग्राफ केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी (National Security) के लिए भी खतरा है। मानव तस्करी के तार अक्सर बड़े अपराधों और ड्रग्स माफियाओं से जुड़े होते हैं। अगर समय रहते इस पर लगाम नहीं कसी गई, तो यह जिला अपराध का ऐसा केंद्र बन जाएगा जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं होगी। जिले में पनप रहा यह काला धंधा सभ्य समाज के माथे पर कलंक है। जरूरत है कि लखीमपुर खीरी के पुलिस कप्तान (SP) स्वयं इस मामले का संज्ञान लें और एक विशेष टीम (SIT) का गठन कर इन ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की जाए। छोटे प्यादों के बजाय उन बड़े मगरमच्छों को पकड़ने की जरूरत है जो मासूम लड़कियों और मजबूर महिलाओं की मजबूरी का सौदा कर रहे हैं। लेकिन अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘गंदगी’ को साफ करने के लिए झाड़ू उठाता है या फिर यह सिसकती जिंदगियां इसी तरह अंधेरे में गुम होती रहेंगी।

Report BY: संजय कुमार 

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