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Magh Shivratri: माघ मास की चतुर्दशी पर मासिक शिवरात्रि, जानें पूजन का शुभ समय

माघ मास की मासिक शिवरात्रि का पावन पर्व

Magh Shivratri: हिन्दू धर्म में चाहे पूजा-पाठ हो या कोई भी शुभ कार्य, पंचांग का ध्यान अत्यंत आवश्यक माना जाता है। सनातन संस्कृति में पंचांग के पांचों अंगों के आधार पर ही किसी कार्य की तिथि, समय और विधि तय की जाती है। हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाता है। इस बार माघ मास की मासिक शिवरात्रि 17 जनवरी को मनाई जाएगी।

Magh Shivratri: माघ मास की मासिक शिवरात्रि का पावन पर्व
माघ मास की मासिक शिवरात्रि का पावन पर्व

शिव-गौरी पूजन की संपूर्ण विधि

यह दिन देवों के देव महादेव और मां पार्वती की आराधना के लिए विशेष रूप से समर्पित होता है। दृक पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 16 जनवरी की रात 10 बजकर 21 मिनट से प्रारंभ होकर 18 जनवरी की रात 12 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। चूंकि निशिता काल 17 जनवरी को पड़ रहा है, इसलिए इसी दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाएगा।

Magh Shivratri: मां गौरी के 16 श्रृंगार का महत्व

इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को शिवलिंग पर जल, दूध, घी और शहद से अभिषेक कर इत्र का लेप करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, फूल-फल, भांग, अबीर-बुक्का और मेहंदी अर्पित करें। वहीं, मां गौरी को 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित कर उनका विधिवत श्रृंगार करें और मीठे पदार्थ का भोग लगाएं। इसके बाद “गौरी केदारेश्वराभ्यां नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप कर रात्रि जागरण और भगवान का ध्यान करें। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान और सच्ची श्रद्धा से की गई शिव-गौरी पूजा से पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Magh Shivratri: माघ मास की मासिक शिवरात्रि का पावन पर्व
माघ मास की मासिक शिवरात्रि का पावन पर्व

निशिता काल का सटीक समय

पूजन से पहले दिन के शुभ-अशुभ मुहूर्तों पर भी ध्यान देना जरूरी है। दृक पंचांग के अनुसार, 17 जनवरी को कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि दिन भर रहेगी। मूल नक्षत्र सुबह 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र आरंभ होगा। व्याघात योग रात्रि 9 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। करण विष्टि सुबह 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद शकुनि करण होगा। इस दिन चंद्रमा धनु राशि में संचार करेंगे। सूर्योदय सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 48 मिनट पर होगा।

राहुकाल में किन कार्यों से बचें

शुभ मुहूर्त की बात करें तो निशिता काल पूजा के लिए मध्य रात्रि लगभग 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान गौरी-शंकर की पूजा, रुद्राभिषेक और मंत्र जप विशेष फलदायी होता है। वहीं, राहुकाल सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा, इस समय किसी भी शुभ या नए कार्य से बचना चाहिए।

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