Home » महाराष्ट्र » महाराष्ट्र में साइबर ठगों का नया खेल, चोरी के पैसों से भरते थे क्रेडिट कार्ड बिल

महाराष्ट्र में साइबर ठगों का नया खेल, चोरी के पैसों से भरते थे क्रेडिट कार्ड बिल

Maharashtra news: साइबर अपराधियों ने अब ठगी के पैसे को सफेद बनाने का ऐसा तरीका खोज निकाला है जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया है। महाराष्ट्र में सामने आए एक मामले में ठग चोरी के पैसों से लोगों के क्रेडिट कार्ड बिल भर रहे थे और बदले में नकद रकम वसूल रहे थे। जांच में खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क की जड़ें झारखंड के कुख्यात जामताड़ा साइबर गिरोह तक पहुंचती हैं।

5.44 लाख की ठगी से खुला बड़ा राज

पूरा मामला तब सामने आया जब मुंबई के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से 5.44 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई। ठगों ने खुद को गैस कंपनी का कर्मचारी बताकर पीड़ित को एक फर्जी मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा। ऐप इंस्टॉल होते ही अपराधियों को फोन का रिमोट एक्सेस मिल गया और उन्होंने बैंकिंग तथा क्रेडिट कार्ड की जानकारी हासिल कर खाते से लाखों रुपये निकाल लिए। जांच शुरू हुई तो पुलिस को एक चौंकाने वाली बात पता चली। ठगी की रकम किसी फर्जी खाते में ट्रांसफर नहीं की जा रही थी, बल्कि उससे अलग-अलग लोगों के क्रेडिट कार्ड बिल चुकाए जा रहे थे।

Maharashtra news: कैसे फंसाए जाते थे कारोबारी?

पुलिस के अनुसार गिरोह ऐसे व्यापारियों और छोटे कारोबारियों को निशाना बनाता था जिनके क्रेडिट कार्ड पर बड़ा बकाया होता था। एजेंट उन्हें कम रकम में पूरा बकाया खत्म कराने का लालच देते थे। उन्हें बताया जाता था कि बैंक में “ऊंचे संपर्क” होने के कारण उनका एक लाख रुपये का बकाया सिर्फ 70 से 80 हजार रुपये में निपटाया जा सकता है। इसके बाद साइबर ठगी से हासिल पैसे से पूरा बिल भर दिया जाता था और कार्डधारक नकद रकम गिरोह को सौंप देता था।

Maharashtra news: दो कारोबारी भी बने नेटवर्क का हिस्सा

जांच में नवी मुंबई के एक कपड़ा व्यापारी और ठाणे के एक ट्रैवल ऑपरेटर का नाम सामने आया। पुलिस के मुताबिक दोनों के क्रेडिट कार्ड का लाखों रुपये का बकाया इसी तरीके से चुकाया गया था। बाद में उन्होंने आरोपी को नकद रकम दे दी। हालांकि दोनों का कहना है कि उन्हें यह नहीं पता था कि उनके कार्ड का भुगतान साइबर ठगी के पैसों से किया गया है।

दो आरोपी गिरफ्तार

मामले में कफ परेड पुलिस ने बेलापुर से गोविंद मंडल और उसके साथी मदन साहू को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के मोबाइल फोन से कई लोगों के क्रेडिट कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और लेन-देन से जुड़े अहम सबूत मिले हैं। पुलिस अब तक 26 ऐसे क्रेडिट कार्ड बिलों का पता लगा चुकी है जिनका भुगतान साइबर ठगी की रकम से किया गया था। शुरुआती जांच में 100 से ज्यादा व्यापारियों के इस नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

साइबर ठगों का नया मनी लॉन्ड्रिंग मॉडल

जांच में सामने आया कि यह पूरा खेल छह चरणों में चलता था। सबसे पहले निवेश घोटाले, फिशिंग, फर्जी कस्टमर केयर कॉल या डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों से लोगों से पैसे ठगे जाते थे। इसके बाद भारी क्रेडिट कार्ड बकाया वाले लोगों की तलाश की जाती थी। एजेंट कम रकम में पूरा बकाया खत्म कराने का झांसा देते थे। ठगी की रकम से सीधे क्रेडिट कार्ड का बिल जमा कर दिया जाता था। कार्डधारक भुगतान की पुष्टि मिलने के बाद नकद रकम एजेंट को सौंप देता था।इस प्रक्रिया में चोरी का पैसा साफ नकदी में बदल जाता था और अपराधियों के लिए उसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।

पुलिस की चेतावनी

Maharashtra news: पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई व्यक्ति या एजेंट बाजार से काफी कम रकम में क्रेडिट कार्ड बकाया खत्म कराने का दावा करे तो सतर्क हो जाएं। ऐसा ऑफर साइबर अपराधियों के मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है और अनजाने में कोई भी व्यक्ति कानूनी जांच के दायरे में सकता है।

 

 

ये भी पढ़े: Airtel यूजर्स परेशान! कॉल और इंटरनेट सेवाओं में आई दिक्कत, सोशल मीडिया पर शिकायतों की बाढ़