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“राजनीति अब निजी स्वार्थ का धंधा बन गई है”- दल-बदल करने वाले नेताओं पर शिवसेना का तीखा प्रहार

MAHARASTRA NEWS: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर कथित बगावत और नेताओं के दल बदलने की चर्चाओं के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने भारतीय राजनीति पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया है कि आज की राजनीति विचारधारा और जनसेवा से भटककर निजी स्वार्थ और अवसरवाद का माध्यम बनती जा रही है।

‘वोट विचारधारा को मिलता है, नेता पाला बदल लेते हैं’

मीडिया में कहा गया है कि मतदाता किसी पार्टी के चुनाव चिन्ह, विचारधारा और नेतृत्व पर भरोसा करके वोट देते हैं, लेकिन कई नेता व्यक्तिगत लाभ के लिए चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदल लेते हैं। ऐसे नेताओं को लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात करने वाला बताया गया है।

MAHARASTRA NEWS: सायोनी घोष का नाम लेकर साधा निशाना

सायोनी घोष  (Sayoni Ghosh( का उल्लेख करते हुए उन्हें अवसरवादी राजनीति का उदाहरण बताया गया। शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान सायोनी घोष ने खुद को ममता बनर्जी की कट्टर समर्थक और भाजपा की मुखर विरोधी के रूप में प्रस्तुत किया था, लेकिन अब उनका नाम कथित बागी सांसदों की सूची में सामने आ रहा है।

‘मिनी ममता’ से बागी नेता तक

‘सामना’ में कहा गया कि सायोनी घोष ने अपने भाषणों के जरिए “मिनी ममता” की छवि बनाई थी और तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में जोरदार प्रचार किया था। ऐसे में उनके नाम की चर्चा बागी खेमे में होना राजनीतिक हलकों के लिए आश्चर्य का विषय है।

MAHARASTRA NEWS: दल-बदलुओं की तुलना ‘थाली के बैंगन’ से

संपादकीय में दल बदलने वाले नेताओं की तुलना “थाली के बैंगन” से की गई। लेख में कहा गया कि ऐसे नेताओं की कोई स्थायी विचारधारा या राजनीतिक प्रतिबद्धता नहीं होती और वे परिस्थितियों के अनुसार किसी भी दल में शामिल हो जाते हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति का भी जिक्र

शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति भी हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर दलबदल की गवाह रही है। पार्टी का आरोप है कि राजनीतिक लाभ और सत्ता की लालसा के कारण नेताओं में वैचारिक प्रतिबद्धता कमजोर होती जा रही है।

MAHARASTRA NEWS: ‘राजनीति में विचारधारा का संकट’

संपादकीय के अंत में कहा गया कि भारतीय राजनीति में विचारधारा और नैतिकता का संकट गहराता जा रहा है। अवसरवादी राजनीति का बढ़ता चलन लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक मूल्यों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

शिवसेना (यूबीटी) का मानना है कि जनता को ऐसे नेताओं के प्रति सतर्क रहना चाहिए, जो चुनाव के दौरान एक विचारधारा का समर्थन करते हैं और बाद में निजी हितों के लिए उसका त्याग कर देते हैं।

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