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TMC में ममता बनर्जी को बड़ा झटका, अनुब्रत मंडल बागी खेमे में शामिल; बीरभूम जिला अध्यक्ष की मिली जिम्मेदारी

Mamata Banerjee

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी सियासी उठापटक लगातार गहराती जा रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले और बीरभूम के प्रभावशाली नेता अनुब्रत मंडल ने अब आधिकारिक तौर पर रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे का दामन थाम लिया है। इतना ही नहीं, बागी गुट ने उन्हें बीरभूम जिला अध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी भी सौंप दी है। अनुब्रत मंडल के इस फैसले को टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में कई वरिष्ठ नेता भी पार्टी छोड़कर बागी गुट में शामिल हो चुके हैं।

बागी खेमे ने अनुब्रत मंडल को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रितब्रत बनर्जी ने अनुब्रत मंडल के बागी गुट में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि संगठन को मजबूत करने और बीरभूम जिले में पार्टी की पकड़ बढ़ाने के उद्देश्य से अनुब्रत मंडल को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। लंबे समय तक टीएमसी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे अनुब्रत मंडल के इस कदम को राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

Mamata Banerjee: कई दिनों से चल रही थी पाला बदलने की चर्चा

अनुब्रत मंडल के बागी खेमे में जाने की अटकलें पिछले कई दिनों से लगाई जा रही थीं। रितब्रत बनर्जी ने पहले दावा किया था कि 4 मई के बाद से उनकी अनुब्रत मंडल से लगभग 30 बार बातचीत हुई थी। इसके बाद उनके पार्टी छोड़ने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। इससे पहले पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा और काजल शेख सहित कई अन्य नेता भी ममता बनर्जी का साथ छोड़कर बागी गुट में शामिल हो चुके हैं, जिससे टीएमसी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।

पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर भी दावा करने की तैयारी

बागी गुट केवल नए नेताओं को जोड़ने तक सीमित नहीं रहना चाहता। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह गुट अब तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर भी दावा मजबूत करने की तैयारी में जुटा है। इसके लिए चुनाव आयोग को भेजे जाने वाले जवाब का मसौदा तैयार किया जा रहा है। यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो आने वाले समय में टीएमसी के भीतर कानूनी और राजनीतिक संघर्ष और तेज हो सकता है।

Mamata Banerjee: जेल से रिहाई के बाद नई राजनीतिक पारी, टीएमसी ने बताया ‘गद्दार’

अनुब्रत मंडल कथित गो-तस्करी मामले में करीब 25 महीने तक जेल में रहे थे। उन्हें सितंबर 2024 में जमानत मिली थी। रिहाई के बाद वह लंबे समय तक राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं दिखे, लेकिन अब बागी गुट में शामिल होकर उन्होंने नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है। दूसरी ओर, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “गद्दार” करार दिया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की असली पहचान ममता बनर्जी से है और जहां ममता बनर्जी हैं, वहीं वास्तविक टीएमसी है। उनके अनुसार, केवल नई कार्यसमिति बना लेने से किसी गुट को पार्टी की वैधता नहीं मिल जाती।

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