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ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की अमेरिका-इजराइल को चेतावनी

Mojtaba Khamenei:

Mojtaba Khamenei: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अपने पिता एवं पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है। उन्होंने कहा कि उनके पिता का खून बेकार नहीं जाएगा और दोषियों को इसकी कीमत चुकानी होगी। मुज्तबा के इस बयान के बाद पहले से ही तनावपूर्ण मध्य पूर्व में हालात और अधिक गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।

पहले संबोधन में बदले की बात, अमेरिका-इजराइल को दी चेतावनी

देश को संबोधित करते हुए मुज्तबा खामेनेई ने कहा कि उनके पिता के “बेगुनाह खून” का बदला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक नारा नहीं बल्कि पूरे देश की इच्छा और जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चाहे वह स्वयं इस पद पर रहें या नहीं, लेकिन बदला लेना आवश्यक है। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने ईरान पर हमला किया, वे कभी शांति से जीवन या मृत्यु का अनुभव नहीं कर पाएंगे। उन्होंने दावा किया कि दोषियों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Mojtaba Khamenei: पिता के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ का जताया आभार

मुज्तबा खामेनेई ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल हुए लाखों लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अंतिम विदाई में उमड़ी भीड़ ने दुनिया को ईरान की एकजुटता का संदेश दिया है। उनके अनुसार यह जनसमर्थन देश के विरोधियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि ईरानी जनता अपने नेतृत्व और देश के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने इसे “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि इससे दुश्मनों का मनोबल कमजोर हुआ है।

अली खामेनेई की हत्या और अंतिम संस्कार

रिपोर्ट के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या ईरान-अमेरिका संघर्ष के शुरुआती दौर में हुई थी। इसके बाद 4 जुलाई से 9 जुलाई तक अंतिम विदाई से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए और 9 जुलाई को उन्हें मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में देश-विदेश से लोग शामिल हुए। इस दौरान ईरानी प्रशासन और सेना ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए तथा हवाई और सीमाई क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी।

Mojtaba Khamenei: सीजफायर टूटने के बाद फिर बढ़ा तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच कई महीनों तक चले संघर्ष के बाद 17 जून 2026 को 60 दिनों के युद्धविराम पर सहमति बनी थी। हालांकि, जुलाई के पहले सप्ताह में हालात फिर बिगड़ गए। होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई तेज हो गई। इसके बाद अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर हमले किए, जिससे युद्धविराम प्रभावी नहीं रह सका। मौजूदा स्थिति में दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है।

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