Mathura News: ब्रज की आस्था के सबसे बड़े आयोजनों में शामिल मुड़िया पूर्णिमा मेले में इस बार भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवकों ने सेवा और समर्पण की एक मिसाल पेश की। यहां लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच गोवर्धन की दानघाटी मंदिर परिक्रमा मार्ग पर संघ के 100 से अधिक स्वयंसेवक बिना किसी औपचारिक निमंत्रण और बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के सेवा कार्यों में जुटे दिखाई दिए।
क्या रही स्वयंसेवकों की प्राथमिकता?
मेले के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही आवश्यकताएं भी कई गुना बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में संघ के स्वयंसेवकों ने चिकित्सा सहायता, भोजन व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालकर लोगों की मदद की। श्रद्धालुओं को सही मार्गदर्शन देना, आपात स्थिति में सहायता पहुंचाना और व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना स्वयंसेवकों की प्राथमिकता रही। स्वयंसेवकों का कार्य देख लोगों का कहना है कि संघ के कार्यकर्ता केवल किसी कार्यक्रम या आयोजन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज की जरूरत के समय हमेशा आगे दिखाई देते हैं। यही कारण है कि सेवा कार्यों के माध्यम से समाज में संघ के प्रति विश्वास और सम्मान लगातार बढ़ता दिखाई देता है।

Mathura News: सेवा ही सबसे बड़ा धर्म
संघ के स्वयंसेवक बिना किसी वेतन, पद या व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा के कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य केवल समाज सेवा और राष्ट्रहित होता है। प्राकृतिक आपदाओं, धार्मिक आयोजनों या किसी भी संकट की घड़ी में संघ के स्वयंसेवक अक्सर सबसे पहले सहायता के लिए पहुंचते हैं। गोवर्धन के मूड़िया पूर्णिमा मेले में भी संघ के स्वयंसेवकों की सक्रियता ने यह संदेश दिया कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। लाखों श्रद्धालुओं के बीच निस्वार्थ भाव से की गई यह सेवा समाज में सहयोग, अनुशासन और समर्पण की भावना को मजबूत करने का कार्य करती है।
वहीं इस सेवा भाव को लेकर जिला कोसी के जिला प्रचारक खुश चाहर का कहना है कि सेवा संगठन की कार्यशैली का प्रमुख आधार है। इसी भावना के तहत हर वर्ष की तरह इस बार भी मुड़िया पूर्णिमा मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न सेवा शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से स्वयंसेवक दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालुओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि उनकी यात्रा और गोवर्धन परिक्रमा बिना किसी परेशानी के पूरी हो सके।
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