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राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका में भारतीयों से परेशान!

Modi-Trump

Modi-Trump: पांच दिन बाद अमेरिका के लासएंजलिस में मेयर के चुनाव समाप्त होने जा रहे हैं। इस चुनाव में भारतीय मूल की नित्या रमन की संभावनाएं मेयर पद के लिए संभावित हैं। रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार के खिलाप प्रोग्रेसिव नित्या की संभावनाएं चुनाव में जीतने के करीब हैं। यदि वह लासएंजलिस से चुनाव जीत जाती हैं, तो अमेरिका के न्यूयार्क शहर जहां जोरान ममडानी मेयर हैं के बाद दूसरी सिटी होगी, जहां पर भारतीय मूल की मेयर होंगी। यह ट्रंप के लिए असहनीय हो रहा है।

नित्या रमन कौन!

नित्या रमन का जन्म केरल में तमिल परिवार में हुआ। बचपन में ही वह लुसियाना चली गई थी। इसने हाॅवर्ड से राजनीति के सिद्धांत में पढ़ाई की और अरबन प्लानिंग एमआईटी से की। फिर वापस भारत लौट आईं। 22 वर्ष की उम्र में नित्या ने अमेरिका की नागरिकता प्राप्त कर ली थी। बाद में लासएंजलिस के सिटी कांउसिल का चुनाव लड़ी। और उसमें जीत हासिल की। अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए कमला हैरस का डेमोक्रेटिक पार्टी से चुनाव लड़ना, भारतीय मूल के लोगों का अमेरिका में हौंसले बुलंद करता है। यही नहीं भारत की जनता भी अमेरिका में भारतीयों की उन्नति पर खुश होते हैं। अमेरिका की एक अदालत ने एच-1बी बीसा की भारी भरकम फीस, जो ट्रंप ने एक करोड़ रुपये कर दी थी, उसे गैर कानूनी करार कर दिया है। देखा जाए तो यह राष्ट्रपति ट्रंप पर एक करारा तमाचा है। फीस भी बढ़ानी थी, तो ऐसी छलांग नहीं मारनी चाहिए थी, जो सीमा से बाहर जाए।

अमेरिका में एच-1बी वीसा कार्यक्रम के अंर्तगत 65हजार वीसा हर वर्ष जारी किये जाते हैं। बाकी 20 हजार वीसा कामगारों के लिए जारी किये जाते हैं, जिनकी एडवांस डिग्री 3 से 6वर्ष के लिए एपू्रव हो। यह वीसा ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले से चले आ रहे हैं। सच तो यह है कि अमेरिका हमारा कठिनाई का साथी नहीं रहा है। जब भी देश में संकट आया, तब वह हमारे साथ खड़ा नहीं रहा। व्यापार ही जिसका मकसद हो, वह सच्चा मित्र नहीं हो सकता। विगत महीनों ही नहीं, वर्षों में भी अमेरिका का हाथ दोस्ती का नहीं रहा। सिर्फ व्यापार ही मुख्य उद्येश्य रहा। जबकि भारत के लोग अमेरिका की प्रोसपेरिटी के लिए अमेरिका के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। किसी भी क्षेत्र में देख लें। विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय मूल के लोग जम कर अमेरिका की नाक को ऊंचा कर रहे हैं। अंतरिक्ष अध्ययन के क्षेत्र में भारतीय मूल की महिला सुनीता विलियम्स ने, वह काम विकट परिस्थिति में किया, जो सामान्य जन नहीं कर सकता था। बड़ी-बड़ी फर्मो के उच्च पदों पर भारतीय मूल के लोग ही बैठे हैं। यह ट्रंप को नहीं भूलना चाहिए।

लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल

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