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हाथ में होनी थी किताब, भीख मांगने को मजबूर मासूम, मुरादाबाद डीएम से शिक्षा की गुहार

Moradabad: हाथ में होनी थी किताब, भीख मांगने को मजबूर मासूम

Moradabad: कभी-कभी कुछ शब्द इतने गहरे होते हैं कि वे किसी रिपोर्ट, आंकड़े या भाषण से कहीं अधिक असर छोड़ जाते हैं। मुरादाबाद के एक छोटे से बच्चे के मुंह से निकले ये शब्द मेरे पापा नहीं हैं…लेकिन मुझे पढ़ना है यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि उस दर्द की आवाज़ हैं, जिसे सुनकर हर एक इंसान की आंखें नम हो जाएं। एक पत्रकार ने बच्चे से जब पूछा कि “स्कूल क्यों नहीं जाते” तब बच्चे ने मासूमियत से जवाब दिया, एडमिशन नहीं हुआ। जब बच्चे से बोला गया “पापा को साथ लेकर जाओ, स्कूल में नाम लिखवा लो” तब इसके बाद जो जवाब आया, उसने हर सुनने वाले को झकझोर दिया।

मेरे पापा नहीं हैं, मुझे पढ़ना है

तो वो जवाब था “मेरे पापा नहीं हैं… लेकिन मुझे पढ़ना है” सोचिए, एक ऐसा बच्चा जिसने शायद बचपन में ही पिता का साया खो दिया, जिसके पास संसाधन नहीं हैं, लेकिन जिसके सपने आज भी जिंदा हैं। उसे किसी महंगे खिलौनों की चाह नहीं, बल्कि उसे सिर्फ स्कूल जाना है, पढ़ना है और जिंदगी में आगे बढ़ना है। शिक्षा हर बच्चे का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन जब किसी बच्चे को सिर्फ इसलिए स्कूल से दूर रहना पड़े क्योंकि उसके साथ पिता नहीं हैं या परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, तब यह केवल उस परिवार की नहीं, पूरे समाज की विफलता बन जाती है।

हर वर्ष हम शिक्षा, बाल अधिकार और समान अवसर की बातें करते हैं। योजनाएं बनती हैं, अभियान चलते हैं, लेकिन ऐसे बच्चे हमें याद दिलाते हैं कि अभी भी कई सपने स्कूल के दरवाजे तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। यह बच्चा किसी पर एहसान नहीं मांग रहा। वह भीख नहीं मांग रहा। वह केवल अपना अधिकार मांग रहा है, पढ़ने का, आगे बढ़ने का तथा सम्मान के साथ जीने का ।

Moradabad: प्रशासन तथा समाजसेवी संस्थाओं से अपील

आज जरूरत केवल सरकारी मदद की नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता की भी है। यदि प्रशासन, स्थानीय समाजसेवी, शिक्षक और जागरूक नागरिक मिलकर बच्चे का हाथ थाम लें, तो उसकी पूरी जिंदगी बदल सकती है। यह अपील केवल प्रशासन से नहीं, हम सभी से है। अगर हमारे आसपास भी कोई ऐसा बच्चा है जो गरीबी, अनाथ होने या मजबूरी के कारण स्कूल नहीं जा पा रहा है, तो हमें आगे बढ़कर उसकी मदद करनी चाहिए। क्योंकि किसी बच्चे की शिक्षा पर किया गया हर प्रयास भविष्य के भारत में निवेश है।

उस मासूम की आखिरी बात आपके कानों में जरुर गूंज रही होगी

उम्मीद है यह आवाज़ केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसी जिम्मेदार हाथ तक पहुंचेगी और एक बच्चे का सपना सच हो सकेगा। क्योंकि कभी-कभी किसी की पूरी जिंदगी बदलने के लिए सिर्फ एक संवेदनशील फैसला ही काफी होता है।

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