Narottam Mishra: मध्य प्रदेश के दतिया में पूर्व गृहमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक सक्रियता एक बार फिर चर्चा में है। रविवार को उनके नेतृत्व में ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ निकाली गई, जिसमें 500 से ज्यादा चार पहिया वाहन शामिल होने का दावा किया गया। पीतांबरा पीठ से शुरू हुई यह यात्रा ग्रामीण इलाकों से होते हुए रतनगढ़ माता मंदिर तक पहुंची। बड़ी संख्या में वाहनों और जगह-जगह हुए स्वागत के कारण इस कार्यक्रम को दतिया की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
पीतांबरा पीठ से रतनगढ़ तक निकली यात्रा
यात्रा की शुरुआत सुबह करीब 10 बजे दतिया स्थित पीतांबरा पीठ मंदिर से हुई और दोपहर करीब 1 बजे रतनगढ़ माता मंदिर पहुंचकर यात्रा का समापन हुआ। इस दौरान धीरपुर, इंदरगढ़, थरेट और भाऊआपूरा समेत रास्ते में कई जगह नरोत्तम मिश्रा का स्वागत किया गया। कुछ स्थानों पर आतिशबाजी की गई तो कहीं जेसीबी के जरिए फूल बरसाए गए।
Narottam Mishra: 500 से ज्यादा गाड़ियों का काफिला
यात्रा की सबसे ज्यादा चर्चा 500 से अधिक चार पहिया वाहनों के काफिले को लेकर है। इसमें सेवढ़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल सहित बीजेपी के कई स्थानीय नेता और समर्थक शामिल हुए। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि, जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि और नगर पालिका से जुड़े पदाधिकारियों की मौजूदगी भी रही। इतने बड़े काफिले को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में इसे नरोत्तम मिश्रा की क्षेत्र में सक्रियता और समर्थक आधार के प्रदर्शन के तौर पर चर्चा मिल रही है।
उपचुनाव के बाद फिर बढ़ी सक्रियता
दतिया की सियासत में नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता ऐसे समय बढ़ी है, जब हाल ही में हुए विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। चुनाव में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने आशुतोष तिवारी को 6 हजार से ज्यादा मतों से हराया। नरोत्तम मिश्रा ने नतीजे के बाद कहा था कि वह किसी पद की इच्छा नहीं रखते और कार्यकर्ता के रूप में काम करना चाहते हैं।
Narottam Mishra: BJP की स्थानीय सियासत में क्या संदेश?
अब संकल्प यात्रा के जरिए नरोत्तम मिश्रा की बड़ी मौजूदगी ने दतिया की बीजेपी सियासत को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। खासकर उपचुनाव में टिकट को लेकर पहले सामने आए घटनाक्रम और उसके बाद पार्टी की हार की पृष्ठभूमि में इस कार्यक्रम को देखा जा रहा है। हालांकि, यात्रा का घोषित उद्देश्य ‘विकसित भारत’ के संकल्प और जनसंपर्क से जुड़ा है। इसे सीधे किसी आगामी चुनाव या संगठनात्मक रणनीति से जोड़ना फिलहाल अनुमान होगा।
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