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Nepal Disaster: नेपाल को आपदा से उबरने में कई साल लग जाएंगे, अरबों डॉलर की जरूरत

Nepal Disaster: नेपाल को आपदा से उबरने में कई साल लग जाएंगे, अरबों डॉलर की जरूरत
Nepal Disaster: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ ने जो तबाही मचाई है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।देश में मरने वालों की संख्या 900 के पार पहुंच गई है।करीब 4200 लोग लापता हैं, जिनमें से 592 विदेशी नागरिक शामिल हैं।मलबे में शवों के मिलने का सिलसिला जारी है।स्थिति अभी सामान्य नहीं है, खतरे की आशंकाएं बराबर लोगों को डरा रही हैं।स्थिति समान्य हुई भी तो पुनर्मिर्माण की बड़ी चुनौती सामने होगी।भीषण तबाही के कारण देश को उबरने में वर्षों लग जाएंगे। 

पीड़ितों तक भोजन और दवाइयां पहुंचाने की समस्या

आपदा में लापता लोगों की तलाश, बचाव और राहत कार्यों के लिए 20,819 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इनमें 8,722 सेना के जवान, 7,894 पुलिसकर्मी और 4,203 सशस्त्र पुलिस बल के जवान शामिल हैं।ये जवान तत्परता से अपना काम कर रहे हैं, लेकिन दिक्कत यह है कि हिमालयी क्षेत्रों में सड़कों और पुलों के टूटने एवं संचार नेटवर्क चरमरा जाने से राहत एवं बचाव कार्य में बाधाएं आती हैं।नेपाल इसी समस्या से जूझ रहा है।लापता लोगों का पता लगाना और पीड़ितों तक भोजन और चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने में परेशानियां आ रही हैं।

Nepal Disaster: करोड़ों की परियोजनाएं हुई तबाह
विनाशकारी बाढ़ और हिमस्खलन से देश में दर्जनों बड़े पुल, सड़कें, स्कूल और महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाएं नष्ट हो गई हैं। हालात इतने खराब हैं कि इनके पुनर्निर्माण में कई साल लग जाएंगे।पैसे की समस्या अलग से है।शुरुआती अनुमानों के मुताबिक देश के बुनियादी ढांचे, सड़कों और संचार नेटवर्क को ठीक करने के लिए लगभग 4 अरब से 5 अरब डॉलर की जरूरत पड़ेगी।यह राशि देश की कुल अर्थव्यवस्था का लगभग 10 प्रतिशत के बराबर है।

Nepal Disaster: सरकार के सामने बड़ी चुनौती

जानकारों के मुताबिक तबाही इतनी भयंकर है कि घरों, स्कूलों, बाजारों, मुख्य राजमार्गों, पुलों और जलविद्युत संयंत्रों के पुनर्मिर्माण में अभी कई महीने लगेंगे।विस्थापित परिवारों के पुनर्वास में वर्षों का समय लग जाएगा।सरकार के सामने गंभीर चुनौती है कि विस्थापितों का पुनर्वास सुरक्षित जगहों पर कहां-कहां किया जाए? देश में जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए अरबों रुपए का धन कहां से जुटाया जाए? जाहिर है कि आपदा के आँसू सूखने में अभी काफी समय लग सकता है।