NEPAL RESCUE: नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में करीब 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट आए हैं। इनमें काम करने वाले करीब 900 से 1000 कर्मचारियों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है। आशंका है कि इनमें से बड़ी संख्या में लोग प्रोजेक्ट की सुरंगों के अंदर फंसे हो सकते हैं। हादसे को एक सप्ताह बीतने के बावजूद राहत और बचाव अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंगों में जमा मलबा, पानी और अस्थिर चट्टानें हैं।
किन सुरंगों में फंसे हैं लोग?
बचाव अभियान का मुख्य फोकस ऊपरी त्रिशूली, ऊपरी त्रिशूली-3ए, ऊपरी त्रिशूली-3बी, चिलिमे, लंगटांग खोला और मैलुंग खोला जैसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर है। रिपोर्टों के मुताबिक, ऊपरी त्रिशूली-3ए में करीब 42, ऊपरी त्रिशूली-3बी में 122, चिलिमे में 8, लंगटांग खोला में 41 और मैलुंग खोला में 7 लोगों के लापता होने की जानकारी है। रसुवागढ़ी में भी करीब 93 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है।
NEPAL RESCUE: मलबा और पानी बना सबसे बड़ा रोड़ा
बाढ़ के तेज बहाव के साथ सुरंगों में मिट्टी, कीचड़, बड़े पत्थर और बोल्डर भर गए हैं। कई जगह सुरंगों का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हुआ है। ऐसे में सीधे अंदर जाना बचावकर्मियों के लिए बेहद जोखिम भरा है। भारी मशीनों से अचानक खुदाई करने पर कमजोर चट्टानों के खिसकने और सुरंग के और धंसने का खतरा है। कई इलाकों में सड़क और पुल टूटने से एक्सकेवेटर, ड्रिलिंग मशीन और पंप जैसे उपकरण पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है।
भारत-नेपाल की टीमें चला रहीं रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाल ने सुरंग बचाव के लिए भारत, चीन और अन्य देशों से भी मदद मांगी है। भारतीय और नेपाली टीमें चिलिमे और लंगटांग इलाके में बचाव अभियान चला रही हैं। लंगटांग में बचाव दल सुरंग के अंदर करीब 185 मीटर तक पहुंच चुका है। वहीं ऊपरी त्रिशूली-3ए में सुरंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंचकर अंदर हवा पहुंचाने की कोशिश की गई है। इसके साथ ड्रिलिंग और मलबा हटाने का काम भी जारी है।
NEPAL RESCUE: क्या सुरंग में फंसे लोग अभी जिंदा हैं?
सुरंगों में फंसे लोगों के जिंदा होने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ जगहों पर उम्मीद बनी हुई है। कुछ सुरंगों में हवा के लिए खाली जगह होने और खाद्य सामग्री मौजूद होने की जानकारी सामने आई है। इससे बचाव दल को उम्मीद है कि कुछ लोग सुरक्षित हो सकते हैं। हालांकि, अंदर से संपर्क स्थापित नहीं हो पाने के कारण स्थिति की पुष्टि नहीं हो सकी है। बचाव दल पानी निकालने, मलबा हटाने, हवा पहुंचाने और वैकल्पिक रास्ते बनाने की कोशिश लगातार कर रहा है।
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