BCI policy decisions: सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के कामकाज को लेकर बुधवार को अहम आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि BCI के मौजूदा अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा का पद स्थायी नहीं है। वह तब तक ही अध्यक्ष बने रह सकते हैं, जब तक नवगठित संस्था अपने नए पदाधिकारियों का चुनाव नहीं कर लेती। सुप्रीम कोर्ट ने BCI के कामकाज पर भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा कि संस्था अब भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से परामर्श किए बिना कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकेगी।
BCI policy decisions: BCI अध्यक्ष का कार्यकाल अस्थायी-
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने BCI अध्यक्ष के लंबे कार्यकाल को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि अदालत की चिंता किसी व्यक्ति विशेष के आचरण को लेकर नहीं, बल्कि संस्था की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और उसके कामकाज को लेकर है। न्यायमूर्ति बागची ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत मौजूदा व्यवस्था को अपनी मंजूरी नहीं दे रही है।
BCI policy decisions: कार्यकाल बढ़ाने पर उठे सवाल-
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने दलील दी कि नियमों में BCI अध्यक्ष के लिए दो साल के कार्यकाल का प्रावधान था। इसके बावजूद प्रस्ताव पारित कर कार्यकाल को पहले तीन साल और फिर 2030 तक यानी करीब पांच साल के लिए बढ़ाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों का इस्तेमाल चुनाव टालने और पद पर बने रहने के लिए किया गया। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने 2020 में बनाए गए एक ट्रस्ट में 11 प्रबंध न्यासियों को स्थायी बनाए जाने पर सवाल उठाए। अधिवक्ता सीयू सिंह ने भी व्यापक सलाह के बिना प्रस्ताव जारी किए जाने का आरोप लगाया।
BCI अध्यक्ष की ओर से भी सहमति-
BCI अध्यक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्णकुमार ने अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से परामर्श लेने के सुझाव पर सहमति जताई। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नवगठित राज्य बार परिषदों को निर्देश दिया कि वे सह-सदस्यों को नामित करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करें और BCI के नए प्रतिनिधियों का चुनाव कराएं। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।
NALSAR विवाद के बाद बढ़ा मामला-
BCI के कामकाज को लेकर विवाद की पृष्ठभूमि हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से जुड़े घटनाक्रम से भी जुड़ी है। वहां छात्रों ने CJI के मुख्य अतिथि बनने का विरोध किया था। इस विरोध के बाद BCI ने NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के एनरोलमेंट पर अस्थायी रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में BCI ने अपना फैसला वापस ले लिया। इसी दौरान NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने एक साझा पत्र जारी कर NALSAR के छात्रों के साथ बिना शर्त एकजुटता जताई। इसके बाद NLSIU का एक कार्यक्रम भी रद्द करना पड़ा।
अब आगे क्या होगा-
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद BCI में नए प्रतिनिधियों के चुनाव की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। साथ ही, नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से परामर्श की व्यवस्था संस्था के कामकाज में एक महत्वपूर्ण बदलाव मानी जा रही है।
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