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क्या भगवंत मान की यह कवायद सरकार को बचाने की छटपटाहट तो नहीं ? 

New Delhi: क्या भगवंत मान की यह कवायद सरकार को बचाने की छटपटाहट तो नहीं ?
New Delhi: आम आदमी पार्टी (आप) के राज्य सभा सांसदों की टूट के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जो तीखे बयान दिये, उन्हीं से अंदाजा लग गया था कि मान अब अपनी सरकार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। हालांकि मान एवं आप के बड़े नेता बराबर यह दावा करते आ रहे हैं कि पंजाब सरकार को कोई खतरा नहीं है, लेकिन अंदर से वे डरे हुए भी हैं कि राज्य में विधायकों की नाराजगी कहीं सरकार को संकट में न डाल दे।जानकारों का मानना है कि इसी स्थिति को भांपते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है।

सत्र का मुख्य मकसद…

हालांकि सरकार के अनुसार ‘मजदूर दिवस’ के अवसर पर बुलाया गया यह विधानसभा सत्र उन मेहनती मजदूरों और कारीगरों को समर्पित होगा, जो देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में अहम योगदान देते हैं, लेकिन विपक्ष की ओर से इस सत्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह सत्र सिर्फ सरकार बचाने की कवायद मात्र है।इस विशेष सत्र का मुख्य मकसद यह है कि इसमें बहुमत का प्रस्ताव लाया जाएगा।विधानसभा में बहुमत सिद्ध हो जाने के बाद अगले 6 महीने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार सुरक्षित हो जाएगी। मुख्यमंत्री मान की पूरी कवायद यही है। 

 New Delhi: सरकार पर संकट के सवाल क्यों ?

सरकार पर संकट के सवाल यूं ही नहीं उठे हैं, बल्कि इसके ठोस कराण हैं।बताया जाता है कि पंजाब के करीब 28 विधायक भी आम आदमी पार्टी के नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं।विपक्षी तो इनकी संख्या 35-40 बता रहे हैं। इन विधायकों की नाराजी मान सरकार के लिए भारी पड़ सकती है।शायद आम आदमी पार्टी के नेतृत्व को इस बात का अहसास है कि राघव चड्ढा और संदीप पाठक पार्टी संगठन में अहम भूमिका निभा चुके हैं। पंजाब में कई विधायकों को इनकी कृपा से टिकट भी मिले। ये दोनों नाराज विधायकों के साथ मिलकर कोई खेला कर सकते हैं। यही वजह है कि आप का आलाकमान पंजाब में विधायकों को एकजुट रखने में जुट गया है। बताया जाता है कि संजय सिंह और मनीष सिसौदिया जैसे नेताओं ने वहां की कमान संभाल ली है। 
 

New Delhi:  हमलावर हुआ विपक्ष

अब यह अलग बात है कि पंजाब सरकार ने विशेष सत्र मजदूरों को समर्पित किया है, लेकिन इस सत्र को लेकर सरकार ने विपक्ष को सवाल उठाने और हमलावर होने का मौका दे दिया है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा सत्र को सरकार की जल्दबाज़ी और संभावित विश्वास प्रस्ताव की तैयारी से जोड़ते हुए कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी तरह कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि इस प्रकार के सत्रों से कुछ नहीं निकलता।अगर सत्र बुलाना है, तो रेगुलर बुलाया करें।कांग्रेस विधायक पगरट सिंह ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी मजदूरों की आड़ में ड्रामेबाजी कर रही है। दूसरी तरफ अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा है कि AAP सरकार पहले ही अपना बहुमत खो चुकी है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने विधानसभा के विशेष सत्र को सरकारी खजाने पर बोझ बताया है।

New Delhi:   कुनबा बचाने की भी चिंता

 हालांकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकार के पास 94 विधायकों का स्पष्ट बहुमत है, लेकिन यदि किसी को संदेह है, तो सरकार विश्वास प्रस्ताव भी ला सकती है, जिससे अटकलों पर विराम लगाया जा सके। उनकी इस बात से स्पष्ट है कि  विधानसभा का विशेष सत्र वास्तव में सरकार को सुरक्षित रखने की कवायद का हिस्सा है। राज्य में आम आदमी पार्टी आलाकमान को अपना कुनबा बचाने की चिंता है, तो भगवंत मान को सरकार बचाने की।
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