New Delhi: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच चुनाव प्रचार के दौरान जबर्दस्त घमासान चला। दोनों ओर से एक दूसरे को पछाड़ने के लिए जमकर आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला चला। यह चुनावी लड़ाई 4 मई को होने वाली मतगणना को लेकर भी चली। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को मतगणना में गड़बड़ी की आशंका हुई तो वह कोर्ट चली गई, लेकिन पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से भी उसे झटका ही मिला। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतगणना के लिए केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (PSU) के कर्मियों की तैनाती के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की आपत्ति को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को कोई आदेश नहीं दे सकते हैं।इसे ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
क्या थी तृणमूल कांग्रेस की आशंका ?
दरअसल, टीएमसी को लगा कि केंद्र सरकार के कर्मचारी भाजपा के प्रभाव में काम कर सकते हैं। इसलिए राज्य सरकार के कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जाए। टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी जिसमें मतगणना के लिए केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (PSU) के कर्मियों की तैनाती का प्रावधान किया गया है। टीएमसी की आपत्ति यह थी कि इसमें राज्य सरकार और राज्य के PSU कर्मचारियों को शामिल नहीं किया गया।
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?
सुप्रीम कोर्ट ने ने मतगणना प्रक्रिया से जुड़े चुनाव आयोग के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।कोर्ट ने साफ ने कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है और चुनाव आयोग अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर काम कर रहा है।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की विशेष पीठ ने की। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि चुनाव आयोग का परिपत्र नियमों के खिलाफ नहीं है और इसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।
टीएमसी ने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने आपत्ति खारिज करते हुए कहा था कि काउंटिंग स्टाफ की नियुक्ति चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसमें कोई अवैधता नहीं है।








