New Delhi: कांग्रेस कर्नाटक में सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद से हटाना तो चाहती है, लेकिन अंदर से डरी हुई भी है कि कहीं ये दांव पार्टी के लिए भारी न पड़ जाए। दरअसल, सिद्धारमैया राज्य में ओबीसी वोट बैंक को प्रभावित करने वाले एक बड़ा चेहरा हैं। ऐसे में यदि उन्हें सम्मानजनक तरीके से नहीं हटाया गया या उनकी नाराजगी बनी रही, तो आगामी चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मजबूत जनाधार
सिद्धारमैया AHINDA (अल्पसंख्यक, पिछड़े और दलित) और ओबीसी वर्गों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।उनको जबरन हटाने से इन वर्गों का नाराज होना स्वाभाविक है। खास बात यह है कि मजबूत जनाधार होने के साथ ही सिद्धरमैया की छवि एक साफ-सुथरे नेता की भी है।अगर उन्हें हटाया गया और कल उनके समर्थकों को नई कैबिनेट में उचित सम्मान नहीं मिला, तो राज्य में अंदरूनी कलह पैदा होनी स्वाभाविक है।यही वजह है कि कांग्रेस आलाकमान फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है और उनकी सम्मानजनक विदाई का रास्ता तैयार किया जा रहा है। बताया जाता है कि कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को प्रस्ताव दिया कि उन्हें राज्यसभा लाया जाएगा और साथ ही पार्टी संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके साथ ही उनके बेटे डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया को राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री पद दिया जा सकता है।
New Delhi: कांग्रेस का डर क्या है?
आलाकमान सिद्धारमैया की जगह उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की ताजपोशी के पक्ष में है। शिवकुमार समर्थकों का कहना है कि 2023 में केंद्रीय नेतृत्व ने ढाई-ढाई साल की सत्ता का फॉर्मूला दिया था इसलिए सिद्धारमैया को हट जाना चाहिए।शिवकुमार समर्थक लंबे समय से उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग उठाते आ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस आलाकमान को डर है कि कहीं सिद्धारमैया को हटाने के चक्कर में पार्टी न टूट जाए।सिद्धारमैया के पक्ष में 60 से लेकर 70 विधायक बताए जाते हैं।
इस बीच खबरें हैं कि कांग्रेस आलाकमान पार्टी महासचिव वेणुगोपाल को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने और मल्लिकार्जुन खड्गे को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाए जाने के फॉर्मूले पर भी विचार कर रहा है।








