New Delhi: रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ (CEO) नियुक्त किये जाने पर भले ही विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन जनभावनाओं की दृष्टि से देखें, तो यह एक व्यावहारिक फैसला माना जा सकता है। उम्मीदें व्यक्त की जा रही हैं कि एयर मार्शल के नेतृत्व में मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था बड़े अनुशासित और पारदर्शी ढंग से चल पाएगी।
नियुक्ति का बड़ा संदेश
हाल में मंदिर प्रबंधन पर उठे सवालों और चंदा चोरी जैसे आरोपों के चलते एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा जैसे साफ छवि के अधिकारी की नियुक्ति का सबसे बड़ा संदेश यही है कि अब मंदिर की व्यवस्था में अनुसाशन और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। उनकी नियुक्ति से जनता में विश्वास जगेगा कि सैन्य पृष्ठभूमि के अधिकारी की मौजूदगी में नियमों का कड़ाई से पालन हो सकेगा। जनता चाहती है कि राम मंदिर ट्रस्ट में सख्त और साफ छवि का मुखिया हो।
New Delhi: प्रबंधन का अच्छा अनुभव
प्रशासनिक नजरिये से देखें तो जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में करीब 43 साल तक सेवाएं दी हैं। उन्हें संसाधनों और टीमों के प्रबंधन का अच्छा अनुभव है।अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद बड़ी तेजी से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है।अब वहां प्रतिदिन करीब 80 हजार से लेकर 1 लाख श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।रामनवमी और त्योहारों के दौरान यह संख्या 50 लाख तक पहुँच जाती है। वर्ष 2024 में 16 करोड़ से अधिक और 2025 में (अक्टूबर माह तक) लगभग 22.5 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। इतनी बड़ी भीड़ और व्यवस्था के प्रबंधन के लिए एक अनुभवी अधिकारी की जरूरत थी। संभवत: यही वजह है कि चयन समिति और ट्रस्ट को एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा CEO पद के लिए उचित लगे। जानकारी के अनुसार उनकी नियुक्ति का फैसला ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, स्वामी कमलनयन दास और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि सहित अन्य लोगों की उपस्थिति में हुआ।
New Delhi: फैसला उचित क्यों?
जानकारों के मुताबिक 5,000 से ज्यादा आवेदकों की लंबी सूची को दरकिनार कर एयर मार्शल को यूं ही CEO नियुक्त नहीं किया गया, बल्कि सच यह है कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था और भारी भीड़ वाले भव्य परिसर के सुचारू संचालन के लिए अनुभवी और स्वच्छ छवि वाले अधिकारी की जरूरत थी।यदि एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा अपनी सैन्य क्षमता का उपयोग श्रद्धालुओं को बेहतर जन-सुविधाएं देने में करते हैं, तो उनकी नियुक्ति का फैसला उचित साबित होगा।
New Delhi: कांग्रेस ने उठाए सवाल
एक तरफ रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का सीईओ (CEO) बनाए जाने का फैसला उचित बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष की ओर से असहमति के स्वर उठ रहे हैं। कुछ विपक्षी नेताओं का मानना है कि धार्मिक स्थलों और मंदिरों की व्यवस्था मुख्य रूप से पारंपरिक और आध्यात्मिक लोगों (संतों-महात्माओं) द्वारा संभाली जानी चाहिए।कांग्रेस नेता इमरान मसूद का तो यहां तक कहना है कि RSS और बीजेपी ने एक हवाई जहाज उड़ाने वाले को उस काम में फंसा दिया है जो साधु संतों का होता है। उनका कहना है कि रिटायर्ड एयर मार्शल RSS के चंगुल में फंस गए हैं।अब कल को वे भी बेचारे बदनाम होकर निकलेंगे। यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि अगर नए CEO में हिम्मत है, तो चढ़ावा चोरी करने वालों पर एक्शन लेकर दिखाएं। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर एक रिटायर्ड एयर चीफ को नियुक्त किया गया है। आखिर उनका इससे क्या लेना-देना है?
New Delhi: कौन हैं जितेन्द्र मिश्रा?
राम मंदिर के पहले CEO रिटायर्ड एयर मार्शल जितेन्द्र मिश्रा ने अपनी नियुक्ति पर कहा कि ये सब प्रभु राम की कृपा से हुआ है।उन्होंने कहा कि वे पहले फौज में रहकर देश की सेवा कर रहे थे और अब रामलला की सेवा करेंगे।एयर मार्शल जितेन्द्र मिश्रा यूपी में देवरिया के रहने वाले हैं। उन्होंने 43 साल तक एयरफोर्स में सेवाएं दी।ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न कमांड के चीफ के तौर पर उन्होंने बेहद कुशलतापूर्वक युद्ध का संचालन किया। वे फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर भी रहे, फिर एयरफोर्स की वेस्टर्न कमांड का चीफ बने। उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल जैसे प्रतिष्ठित सम्मान हासिल हैं।वे 30 अप्रैल 2026 को एयरफोर्स से रिटायर हुए थे।








